रोज़ाना कितनी चीनी खाना है सुरक्षित?

रोज़ाना कितनी चीनी खाना है सुरक्षित?

How much sugar is safe to eat daily?

आज दुनिया भर के खाद्य पदार्थों में चीनी भरी हुई है, सलाद ड्रेसिंग से लेकर दही तक में चीनी छिपाई गई है, इसकी सुरक्षित मात्रा को समझना स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए बेहद ज़रूरी है। वैश्विक स्वास्थ्य संस्थाओं के उभरते वैज्ञानिक सहमति के अनुसार, मोटापा, हृदय रोग और मेटाबॉलिक समस्याओं के बढ़ते खतरे को कम करने के लिए अतिरिक्त चीनी की सख्त सीमा तय की गई है। लेकिन वास्तव में “सुरक्षित” मात्रा कितनी है? आइए प्रमाण-आधारित दिशानिर्देशों और उनके व्यावहारिक असर को समझते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) सलाह देता है कि वयस्क और बच्चे फ्री शुगर यानी ग्लूकोज और फ्रक्टोज जैसी अतिरिक्त मोनोसैकराइड्स, साथ ही शहद, सिरप और फलों के जूस में मौजूद चीनी को कुल ऊर्जा सेवन के 10% से कम रखें। 2,000 कैलोरी की औसत डाइट में यह लगभग 50 ग्राम या करीब 12 चम्मच के बराबर है।

यदि इसे 5% से नीचे (लगभग 25 ग्राम या 6 चम्मच) रखा जाए, तो दांतों की सड़न से बचाव जैसे अतिरिक्त फायदे मिलते हैं। शोध बताते हैं कि 10% से अधिक चीनी लेने पर वयस्कों का वजन बढ़ने लगता है, जबकि बच्चों में मीठे पेयों के कारण मोटापे का जोखिम बढ़ जाता है।

इसी तरह, अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) अतिरिक्त चीनी को कुल कैलोरी के 6% तक सीमित करने की सलाह दी है, अधिकांश महिलाओं के लिए 100 कैलोरी (25 ग्राम या 6 चम्मच) और पुरुषों के लिए 150 कैलोरी (36 ग्राम या 9 चम्मच)। फल और दूध में मौजूद प्राकृतिक शर्करा पोषण देती है, जबकि अतिरिक्त चीनी सिर्फ “रिक्त कैलोरी” देती है, जो मोटापे का कारण बन सकती है। AHA सॉफ्ट ड्रिंक और मिठाइयों जैसे स्रोतों से सावधान रहने और हाई-फ्रक्टोज कॉर्न सिरप या सुक्रोज जैसे घटकों को लेबल पर जांचने की सलाह देता है।

अमेरिकी CDC और Dietary Guidelines for Americans 2020–2025 के अनुसार, 2 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए अतिरिक्त चीनी कुल दैनिक कैलोरी के 10% से कम होनी चाहिए यानी 2,000 कैलोरी की डाइट में 200 कैलोरी (50 ग्राम) से ज्यादा नहीं। 2 साल से कम उम्र के बच्चों को अतिरिक्त चीनी बिल्कुल नहीं देनी चाहिए। आंकड़े बताते हैं कि औसत भारतीय वयस्क रोज़ लगभग 6 से 10 चम्मच चीनी लेता है, जो अनुशंसित सीमा से काफी अधिक है। मुख्य स्रोतों में मीठे पेय (एक 350ml सोडा में लगभग 10 चम्मच चीनी) और मिठाइयाँ (जैसे कुकीज़ व आइसक्रीम) शामिल हैं।

अत्यधिक सेवन से वजन बढ़ना, टाइप 2 डायबिटीज और हृदय रोग का खतरा बढ़ता है।

वैज्ञानिक प्रमाण भी इन सीमाओं का समर्थन करते हैं। कई अध्ययनों के मेटा-विश्लेषण बताते हैं कि शुगर-युक्त पेय टाइप 2 डायबिटीज के जोखिम से जुड़े हैं, जबकि अधिक चीनी वाली डाइट मोटापे को बढ़ाती है, जो डायबिटीज के 80–85% मामलों से जुड़ा होता है। शारीरिक रूप से, अतिरिक्त चीनी रक्त शर्करा को तेजी से बढ़ाती है और समय के साथ इंसुलिन प्रतिरोध पैदा कर सकती है। इसके विपरीत, प्राकृतिक शर्करा फाइबर के साथ आती है, जिससे उसका अवशोषण धीमा होता है और प्रभाव कम होता है।

टाइप 2 डायबिटीज वाले लोगों के लिए चीनी का नियंत्रण और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि रक्त शर्करा में उतार-चढ़ाव नसों और हृदय से जुड़ी जटिलताओं का कारण बन सकता है। ऐसे मरीजों को अतिरिक्त चीनी सख्ती से सीमित करनी चाहिए—अक्सर 50 ग्राम से कम कुल शर्करा और कम ग्लाइसेमिक खाद्य पदार्थों पर ध्यान देना चाहिए। मीठे पेय, कैंडी और प्रोसेस्ड फूड से बचकर, फाइबर युक्त साबुत फलों को प्राथमिकता देना बेहतर है।

चीनी कम करना मुश्किल नहीं है, सोडा की जगह पानी चुनें, दही लेंते समय शक़्कर का इस्तेमाल न करें और खाद्य पदार्थों के लेबल ध्यान से पढ़ें। छोटे-छोटे बदलाव वैज्ञानिक दिशानिर्देशों के अनुरूप आदतें बनाने में मदद कर सकते हैं और लंबे समय तक स्वास्थ्य बेहतर बना सकते हैं।

यह भी पढ़ें:

मुंबई में 44 साल बाद भाजपा का मेयर; रितु तावड़े ने मेयर का पद संभाला

लोकसभा अध्यक्ष ने त्रुटियों के बावजूद विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव नहीं किया खारिज

विदेश जाने वालों से एफिडेविट लें, राज्यसभा में भाजपा सांसद ने दिया सुझाव! 

Exit mobile version