आज की भागदौड़ भरी दिनचर्या में बेली फैट यानी पेट की चर्बी एक आम समस्या बन चुकी है। घंटों ऑफिस की कुर्सी पर बैठकर काम करना, असमय भोजन करना और तनाव लेना, सबसे पहले पेट पर ही असर डालते हैं। जिम में लंबे समय तक पसीना बहाने के बावजूद कई बार पेट की चर्बी कम नहीं होती। ऐसे में योग सबसे आसान और कारगर उपाय बनकर सामने आता है।
योग के कई आसन बेली फैट घटाने में मदद करते हैं, लेकिन इनमें से मत्स्यासन को खासतौर पर प्रभावी माना जाता है। इसका नाम संस्कृत के दो शब्दों से बना है, जो है मत्स्य (मछली) और आसन (बैठने की मुद्रा)। इस आसन में शरीर की स्थिति मछली जैसी दिखती है, जिसमें छाती को ऊपर उठाया जाता है और सिर को पीछे की ओर झुकाया जाता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, मत्स्यासन सीधा पेट की मांसपेशियों पर काम करता है। सही तरीके से करने पर यह पेट की नसों और मांसपेशियों में खिंचाव पैदा करता है। इससे रक्त प्रवाह सुधरता है और धीरे-धीरे जमा हुआ फैट कम होने लगता है।
यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है। जिन लोगों को लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल पर काम करने से पीठ दर्द और अकड़न की समस्या होती है, उनके लिए मत्स्यासन बेहद राहतकारी है।
मत्स्यासन करने से छाती और फेफड़े मजबूत होते हैं। सांस लेने की क्षमता बढ़ती है, जिससे अस्थमा और सांस की अन्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को फायदा होता है।
यह आसन महिलाओं के लिए भी अत्यधिक उपयोगी माना जाता है। मासिक धर्म के दौरान पेट दर्द, ऐंठन और बेचैनी में राहत देता है। साथ ही गर्भाशय की मांसपेशियों पर सकारात्मक असर डालकर हार्मोन संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मत्स्यासन को नियमित रूप से सही तकनीक के साथ किया जाए, तो यह न केवल पेट की चर्बी घटाने बल्कि शरीर को लचीला, सक्रिय और रोगमुक्त रखने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
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