मोनालिसा के पति पर SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज

मध्य प्रदेश पुलिस ने केरल हाईकोर्ट को दी जानकारी

मोनालिसा के पति पर SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज

A case has been registered against Monalisa's husband under the SC/ST Act.

मध्य प्रदेश पुलिस ने केरला उच्च न्यायालय को बताया है कि वायरल कुंभ मेला सेंसेशन मोनालिसा भोसले के पति फरमान के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसी कारण दंपति की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती। मोनालिसा के पिता द्वारा बेटी के अपहरण का आरोप लगाते हुए दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर यह मामला दर्ज हुआ था, जिसके बाद दंपति ने अग्रिम जमानत के लिए अदालत का रुख किया।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ की पीठ को बताया कि एससी/एसटी एक्ट के प्रावधानों के अनुसार आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) के तहत दायर अग्रिम जमानत याचिका टिक नहीं सकती।

इंदौर की मोनालिसा प्रयागराज कुंभ मेले के दौरान अपनी आकर्षक मुस्कान और आंखों के कारण सोशल मीडिया पर चर्चा में आई थीं। बताया जाता है कि मार्च में वह केरल गईं और अपने प्रेमी फरमान के साथ रहने के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग की थी। इसके बाद दोनों का विवाह सरकारी निगरानी में संपन्न हुआ। बाद में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने आरोप लगाया कि विवाह के समय युवती की उम्र लगभग 16 वर्ष थी और शादी के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। इन आरोपों के बाद मामला विवादों में घिर गया।

जांच के बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने फरमान के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया। फरमान पर ‘लव जिहाद’ के आरोप भी लगाए गए। जब यह मामला पहले हाईकोर्ट के समक्ष आया था, तब पति को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया गया था।

शुक्रवार(29 मई) को हुई सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि यह अपराध अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत आता है और इसमें धारा 3(2)(v) लागू की गई है। उन्होंने बताया कि एससी/एसटी एक्ट की धारा 18 के कारण अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती। उनके अनुसार कथित पीड़िता अनुसूचित जनजाति समुदाय से है, जबकि पहला याचिकाकर्ता उस समुदाय से नहीं है।

एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(v) के अनुसार यदि कोई व्यक्ति अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्य के खिलाफ ऐसा अपराध करता है, जिसकी सजा 10 वर्ष या उससे अधिक है, तो उसे आजीवन कारावास और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

सुनवाई के दौरान दंपति ने अपनी अग्रिम जमानत याचिका में संशोधन की अनुमति मांगी। मध्य प्रदेश पुलिस ने इसका विरोध करते हुए कहा कि प्रस्तावित संशोधन केवल उन कमियों को दूर करने के लिए किए जा रहे हैं, जिनकी ओर अभियोजन पक्ष पहले ही अदालत का ध्यान आकर्षित कर चुका है। एस. वी. राजू ने तर्क दिया कि जिन तथ्यों को संशोधन के जरिए जोड़ा जाना है, वे याचिका दाखिल करते समय ही याचिकाकर्ताओं को ज्ञात थे, इसलिए उन्हें बाद की घटनाएं नहीं माना जा सकता।

राज्य सरकार ने दंपति पर महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने और अपने मामले की कमजोरियों को दूर करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। इसके जवाब में न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ ने टिप्पणी की कि पर्याप्त तर्क पहले ही प्रस्तुत किए जा चुके थे, हालांकि उनमें कुछ विशेष शब्दों का उल्लेख नहीं था।

दंपति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ससिंद्रन ने संशोधित याचिका का समर्थन करते हुए कहा कि अंतरधार्मिक विवाह के कारण उन्हें गंभीर धमकियां मिल रही हैं, इसलिए केरल में जमानत याचिका दायर की गई। उन्होंने दावा किया कि कट्टरपंथी तत्व विवाह की तस्वीरें जलाकर विरोध कर रहे हैं और दंपति को मध्य प्रदेश जाने में भय महसूस हो रहा है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने गिरफ्तारी से संरक्षण देने वाले अंतरिम आदेश को 2 जून तक बढ़ा दिया। साथ ही कहा कि यदि संशोधन याचिका स्वीकार की जाती है, तो आगे की दलीलों पर भी सुनवाई की जाएगी।

मध्य प्रदेश सरकार ने पहले ही अग्रिम जमानत याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाते हुए कहा था कि नियमित अग्रिम जमानत याचिका उसी राज्य की अदालत में दायर की जानी चाहिए, जहां एफआईआर दर्ज हुई हो। चूंकि यह मामला मध्य प्रदेश में दर्ज किया गया है, इसलिए राज्य का तर्क है कि केरल उच्च न्यायालय इस याचिका पर सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र नहीं रखता।

यह भी पढ़ें:

सिर्फ स्वाद नहीं, सेहत का खजाना हैं दालें, जानिए कौन-सी दाल शरीर को क्या देती है फायदा

एसी ऑन करने से पहले आजमाएं ये छोटी की ट्रिक, कमरा तेजी से होगा ठंडा, बिजली की भी होगी बचत

“ट्रम्प के दावे सत्य और असत्य का मिश्रण”

Exit mobile version