बिहार में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (NFSA) के तहत राशन कार्डधारकों की व्यापक समीक्षा के बाद राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 5.5 लाख लोगों के नाम राशन कार्ड सूची से हटा दिए हैं। यह कदम विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान तैयार किए गए मतदाता डेटा और केंद्र सरकार द्वारा कराए गए आय एवं पात्रता सत्यापन अभियान के आधार पर उठाया गया है।
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार बिहार में कुल 1.79 करोड़ राशन कार्डधारक हैं। इनमें से 8,19,888 कार्डों को जांच के दौरान संदिग्ध या पुनः सत्यापन योग्य श्रेणी में रखा गया था। विस्तृत जांच के बाद 5,57,278 राशन कार्डों को निरस्त करने की अनुशंसा की गई, जबकि 2,59,197 कार्डधारकों को पात्र मानते हुए सूची में बनाए रखा गया।
बिहार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी ने बताया कि इस अभियान का लगभग 97.56 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि पात्र लाभार्थियों तक सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने और अपात्र लोगों को सूची से हटाने के उद्देश्य से यह प्रक्रिया चलाई जा रही है।
किन कारणों से हटाए गए नाम?
सरकारी अधिकारियों के अनुसार राशन कार्ड सूची से नाम हटाने के प्रमुख कारणों में लाभार्थियों की मृत्यु, अनिवार्य केवाईसी (KYC) प्रक्रिया पूरी न होना, स्थायी पलायन और आय संबंधी पात्रता मानकों का उल्लंघन शामिल है।
सूत्रों के मुताबिक SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के आंकड़ों का भी उपयोग किया गया। बिहार में इस प्रक्रिया के दौरान लगभग 68 लाख मतदाताओं के नाम विभिन्न कारणों से सूची से हटाए गए थे। इनमें अधिकांश मामले मृत्यु, पलायन और दोहरे पंजीकरण से जुड़े बताए गए हैं।
जिलों में जारी हुई निरस्त लाभार्थियों की सूची
राज्य के सभी 38 जिलों में उपखंड अधिकारियों (SDM) को उन लोगों की सूची सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं, जिनके राशन कार्ड रद्द किए गए हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार मुजफ्फरपुर में 32,360, पटना में 32,626, अररिया में 17,439 और भागलपुर में 11,931 नाम सूची से हटाए गए हैं। इन जिलों में सबसे अधिक निरस्तीकरण दर्ज किया गया है।
बांका जिले के एक सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) डीलर ने बताया कि उनके क्षेत्र में लगभग 3,000 लाभार्थियों में से 400 लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावित व्यक्ति उपखंड अधिकारी या मजिस्ट्रेट के समक्ष अपील कर सकते हैं।
‘क्लीनिंग अभियान’ की बात कर रही सरकार
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली बिहार सरकार पिछले कुछ समय से विभिन्न सरकारी योजनाओं में “शुद्धिकरण अभियान” या “क्लीनिंग ड्राइव” चलाने की बात कर रही है। सरकार का दावा है कि इसका उद्देश्य सरकारी लाभ केवल वास्तविक और पात्र लोगों तक पहुंचाना है।
हालांकि फिलहाल यह अभियान मुख्य रूप से राशन कार्डधारकों तक सीमित है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में अन्य योजनाओं में भी पात्रता सत्यापन की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
अन्य सरकारी डेटाबेस से होगा समन्वय
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राशन कार्ड सत्यापन के दौरान घर-घर जाकर जुटाए गए आंकड़ों को अन्य सरकारी प्रणालियों के साथ भी जोड़ा जाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से मृत्यु, दीर्घकालिक पलायन या अन्य कारणों से हटाया जाता है, तो यह जानकारी खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के साथ साझा की जाती है ताकि संबंधित लाभार्थी रिकॉर्ड को अपडेट किया जा सके।
केंद्र की जांच में सामने आए थे चौंकाने वाले आंकड़े
गौरतलब है कि अगस्त 2025 में केंद्र सरकार द्वारा देशभर के लगभग 20 करोड़ राशन कार्डधारकों का क्रॉस-वेरिफिकेशन कराया गया था। इस जांच में करीब 94.71 लाख आयकरदाता, 17.51 लाख चारपहिया वाहन मालिक और 5.31 लाख कंपनी निदेशक ऐसे पाए गए थे, जो मुफ्त खाद्यान्न योजना का लाभ ले रहे थे।
कुल मिलाकर लगभग 1.17 करोड़ ऐसे लोगों की पहचान हुई थी जिनकी पात्रता पर सवाल उठे थे। इसके बाद राज्यों को जमीनी स्तर पर सत्यापन कर अपात्र लाभार्थियों को सूची से हटाने के निर्देश दिए गए थे।
गरीबों के लिए जारी रहेगी योजना
बिहार में राशन कार्ड सूची के अंतर्गत लगभग 22.93 लाख परिवार अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के तहत आते हैं। इन परिवारों को हर महीने 35 किलोग्राम खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है।
सरकार का कहना है कि अपात्र लोगों को हटाने से वास्तविक गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न और अन्य लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेंगे। हालांकि विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि किसी भी पात्र व्यक्ति का नाम गलती से न हटे, इसके लिए अपील और पुनरीक्षण की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।
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