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कोराटिया टेक्नोलॉजीज के मरीन रोबोट करेंगे भारत के अंडरसी डेटा हाईवे की सुरक्षा

नौसेना का बड़ा कॉन्ट्रेक्ट

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ओडिशा स्थित डीपटेक स्टार्टअप कोराटिया टेक्नोलॉजीज ने भारत की समुद्री सुरक्षा और अंडरसी डेटा नेटवर्क की रक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी को भारतीय नौसेना के लिए स्वदेशी मरीन रोबोट उपलब्ध कराने का ठेका मिला है, जिसका उद्देश्य देश के महत्वपूर्ण समुद्री ढांचे की निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

साल 2021 में NIT राउरकेला के मैकेनिकल इंजीनियरिंग स्नातक देबेंद्र प्रधान और बिस्वजीत स्वैन द्वारा स्थापित इस स्टार्टअप ने कम समय में ही अपनी तकनीकी क्षमता से पहचान बनाई है। शुरुआत में यह प्रोजेक्ट पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की एक अकादमिक चुनौती के तहत विकसित हुआ था, जिसमें स्वायत्त अंडरवाटर रोबोट तैयार किए गए थे। इन रोबोट्स ने सिंगापुर ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल चैलेंज में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हासिल की।

कोराटिया के ये रोबोट समुद्र के भीतर फाइबर-ऑप्टिक केबल, पाइपलाइन, पुल, बंदरगाह और अन्य महत्वपूर्ण ढांचों की निगरानी, निरीक्षण और सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। ये सिस्टम उन कार्यों को भी अंजाम दे सकते हैं जो मानव गोताखोरों के लिए कठिन या जोखिमपूर्ण होते हैं।

कंपनी को रक्षा मंत्रालय की iDEX योजना के तहत 66 करोड़ रुपये का अनुबंध मिला है, जो इसकी तकनीक की विश्वसनीयता और रणनीतिक महत्व को दर्शाता है। इसके अलावा, स्टार्टअप ने अब तक 22 करोड़ रुपये का निवेश भी जुटाया है, जिसमें पाइपर सेरिका एंजेल फंड, एमजीएफ कवच और पॉन्टैक वेंचर्स जैसे निवेशक शामिल हैं।

हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य में अंडरसी केबल्स को लेकर पैदा हुए खतरे ने इस क्षेत्र की अहमियत को और बढ़ा दिया है। दुनिया के लगभग 99 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक इन समुद्री केबल्स के जरिए संचालित होता है, ऐसे में किसी भी प्रकार का व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था और संचार व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

भारत के पास अभी सीमित केबल मरम्मत की क्षमता है, जिससे स्वदेशी निगरानी और सुरक्षा प्रणालियों की आवश्यकता और बढ़ जाती है। कोराटिया के रोबोट इस कमी को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

देश में मरीन रोबोटिक्स का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, जहां प्लैनीस टेक्नोलॉजीज और IROV जैसी कंपनियां भी प्रतिस्पर्धा में हैं। हालांकि, कोराटिया को नौसेना से मिला यह अनुबंध और स्वदेशी तकनीक पर जोर उसे इस क्षेत्र में बढ़त दिला सकता है।

कंपनी का यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य रक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में विदेशी निर्भरता को कम करना है। कोराटिया टेक्नोलॉजीज की यह सफलता दर्शाती है कि कैसे भारत के डीपटेक स्टार्टअप्स राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

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