भारतीय नौसेना ने शुक्रवार (27 फरवरी)को चेन्नई पोर्ट पर अत्याधुनिक एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘आईएनएस अंजदीप’ को औपचारिक रूप से कमीशन किया। इस युद्धपोत के शामिल होने से देश की तटीय सुरक्षा और समुद्री निगरानी क्षमता को महत्वपूर्ण मजबूती मिलने की उम्मीद है।
नौसेना ने सोशल मीडिया मंच X पर कहा, “आत्मनिर्भर भारत की रफ़्तार को जारी रखते हुए! पेश है अंजादीप के कंस्ट्रक्शन का सफ़र – अगला पावरहाउस ASW शैलो वॉटर क्राफ्ट।” यह पोत ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत स्वदेशी निर्माण क्षमता का एक और उदाहरण माना जा रहा है।
जानिए आईएनएस अंजदीप से जुड़ी 7 अहम बातें:
1. एएसडब्ल्यू परियोजना का तीसरा पोत
आईएनएस अंजदीप एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) परियोजना के तहत बनाए जा रहे आठ पोतों में से तीसरी पोत है। यह परियोजना उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित है।
2. स्वदेशी निर्माण
इसका निर्माण कोलकाता स्थित सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा शिपयार्ड कंपनी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने किया है। यह पोत विशेष रूप से ‘लिटोरल कॉम्बैट एनवायरनमेंट’ यानी तटीय और उथले जल क्षेत्रों की चुनौतियों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है।
3. 77 मीटर लंबा, 25 नॉट की रफ्तार
77 मीटर लंबा यह युद्धपोत हाई-स्पीड वॉटर-जेट प्रणोदन प्रणाली से लैस है, जिससे यह अधिकतम 25 नॉट की गति हासिल कर सकता है। इससे त्वरित प्रतिक्रिया और निरंतर अभियान संचालन संभव होगा।
4. ‘डॉल्फिन हंटर’ की भूमिका
इस पोत को ‘डॉल्फिन हंटर’ की भूमिका के लिए तैयार किया गया है। इसका मुख्य कार्य तटीय क्षेत्रों में दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाना, उनका पीछा करना और उन्हें निष्क्रिय करना है।
5. अत्याधुनिक स्वदेशी हथियार प्रणाली
आईएनएस अंजदीप में अत्याधुनिक स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर हथियार और सेंसर पैकेज लगाया गया है। इसमें हुल-माउंटेड सोनार ‘अभय’ के साथ हल्के टॉरपीडो और एएसडब्ल्यू रॉकेट शामिल हैं।
6. नाम का महत्व
‘अंजदीप’ का नाम कर्नाटक के कारवार तट के पास अरब सागर में स्थित एक द्वीप पर रखा गया है। यह नामकरण भारतीय समुद्री विरासत और सामरिक महत्व को दर्शाता है। इस पोत की तैनाती से तमिलनाडु और पुडुचेरी के तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा क्षमता भी मजबूत होगी।
7. बहु-भूमिका क्षमता
पनडुब्बी रोधी अभियानों के अलावा यह युद्धपोत तटीय निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों और सर्च एंड रेस्क्यू (खोज एवं बचाव) अभियानों को भी अंजाम देने में सक्षम है।
INS अंजदीप के कमीशन होने के साथ भारतीय नौसेना ने उथले जल क्षेत्रों में अपनी परिचालन क्षमता को और सुदृढ़ किया है। यह पोत देश के विस्तृत समुद्री हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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