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Sunday, October 18, 2026
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भारतीय सेना 23,000 करोड़ रुपये में 300 और के-9 वज्र तोपें खरीदने की तैयारी में

लंबी दूरी की मारक क्षमता बढ़ाने और सीमा क्षेत्रों में सैन्य ताकत मजबूत करने पर सेना का फोकस

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भारतीय सेना अपनी तोपखाना क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। सेना ने लगभग 23,000 करोड़ रुपये की लागत से 300 अतिरिक्त के-9 वज्र-टी स्वचालित तोपों की खरीद का प्रस्ताव तैयार किया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रस्ताव को आने वाले दिनों में रक्षा खरीद बोर्ड (डीपीबी) के समक्ष विचार के लिए रखा जा सकता है।

यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो यह हाल के दशकों में भारतीय सेना द्वारा शुरू की गई सबसे बड़ी तोपखाना खरीद परियोजनाओं में से एक होगी। यह कदम सेना की लंबी दूरी तक सटीक मारक क्षमता बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

हाल के वैश्विक संघर्षों से मिले अनुभवों ने भी भारतीय सेना के आधुनिकीकरण कार्यक्रम को प्रभावित किया है। आधुनिक युद्धों में लंबी दूरी से सटीक हमले निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं, जिसके चलते सेना अपने तोपखाना बेड़े को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने पर जोर दे रही है।

के-9 वज्र-टी तोपों की अतिरिक्त आवश्यकता का मुख्य कारण इनकी सफल परिचालन क्षमता मानी जा रही है। शुरुआत में इन स्वचालित तोपों को मैदानी और रेगिस्तानी इलाकों के लिए खरीदा गया था, लेकिन बाद में इन्हें चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास पूर्वी लद्दाख के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी तैनात किया गया, जहां इनका प्रदर्शन प्रभावी रहा।

रिपोर्ट के अनुसार, सेना के अधिकारी इस प्रणाली को एक बहुउद्देश्यीय मंच मानते हैं, जो तेज गति से आगे बढ़ने वाली बख्तरबंद इकाइयों को निरंतर अग्नि समर्थन प्रदान करने में सक्षम है। लद्दाख में इसके प्रदर्शन ने पश्चिमी और उत्तरी दोनों मोर्चों पर इसकी उपयोगिता को लेकर सेना का भरोसा और मजबूत किया है।

वर्तमान में भारतीय सेना के पास लगभग 100 के-9 वज्र-टी तोपें मौजूद हैं। वर्ष 2024 में केंद्र सरकार ने उत्तरी सीमाओं पर तोपखाना क्षमता बढ़ाने के लिए 7,629 करोड़ रुपये की लागत से 100 अतिरिक्त तोपों की दूसरी खेप को भी मंजूरी दी थी। अब प्रस्तावित 300 नई तोपों की खरीद से सेना के स्वचालित तोपखाना बेड़े का आकार काफी बढ़ जाएगा और भविष्य के अभियानों के लिए अधिक गतिशील सहायता नेटवर्क तैयार हो सकेगा।

के-9 वज्र-टी एक 155 मिमी/52 कैलिबर की ट्रैक्ड स्वचालित हॉवित्जर तोप है, जो लंबी दूरी तक सटीक फायर सपोर्ट देने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह तेजी से गोले दागने के बाद अपनी स्थिति बदल सकती है, जिससे दुश्मन के जवाबी हमलों का खतरा कम हो जाता है और युद्धक्षेत्र में संचालन की गति बनी रहती है।

यह प्रणाली भारत में लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) द्वारा दक्षिण कोरिया की हनव्हा एयरोस्पेस के सहयोग से निर्मित की जाती है। इसमें स्वदेशी घटकों का महत्वपूर्ण योगदान है, जिसके कारण यह परियोजना भारत के रक्षा विनिर्माण और आत्मनिर्भरता अभियान के लिए भी अहम मानी जाती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रस्ताव सेना के व्यापक तोपखाना आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है। इस कार्यक्रम में एडवांस्ड टोव्ड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस), धनुष तोपों और उन्नत पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट सिस्टम को भी शामिल किया जा रहा है। इन सभी प्रणालियों के जरिए भारतीय सेना की विभिन्न मोर्चों पर तेज, सटीक और निरंतर मारक क्षमता को और मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।

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