भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने देश के पहले अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना की दिशा में अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। संगठन एक साथ कई उच्च प्राथमिकता वाले मिशनों को भी आगे बढ़ा रहा है। कार्यक्रम निदेशक इम्तियाज अहमद ने सोमवार (9 फरवरी)को जानकारी दी कि ISRO इस समय लगभग 80 उपग्रहों पर काम कर रहा है, जिन्हें आने वाले वर्षों में लॉन्च किया जाना है। ये सैटेलाइट्स वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार, आपदा प्रबंधन, आंतरिक सुरक्षा, नेविगेशन और विशेष रूप से गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए पृथ्वी तक सिग्नल रिले करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
समस्तीपुर में भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह ‘आर्यभट’ की स्वर्ण जयंती समारोह के दौरान मीडिया से बातचीत में अहमद ने कहा कि यह उपग्रह भारत के उभरते अंतरिक्ष इकोसिस्टम की रीढ़ हैं और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। उन्होंने बताया कि इस तरह की परियोजनाएं अंतरिक्ष विज्ञान, अन्वेषण और व्यावहारिक अनुप्रयोगों में भारत की क्षमताओं को लगातार विस्तार दे रही हैं।
ISRO के मौजूदा मिशनों में पृथ्वी अवलोकन कार्यक्रम प्रमुख है, जिसका उद्देश्य पर्यावरणीय बदलावों और प्राकृतिक घटनाओं की अत्यधिक सटीक निगरानी करना है। वहीं, नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन (NVS) कार्यक्रम के तहत भारत की क्षेत्रीय सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली को और सशक्त बनाया जा रहा है।
इसके अलावा, इंडियन डेटा रिले सैटेलाइट सिस्टम (IDRSS) संचार के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखता है। यह लो-अर्थ ऑर्बिट में मौजूद उपग्रहों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने में मदद करेगा, जो रियल-टाइम डेटा ट्रांसफर और गगनयान जैसे मानव मिशनों के लिए अत्यंत आवश्यक है। भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम ‘गगनयान मिशन’ ISRO की प्राथमिकताओं में शीर्ष पर है, जिसमें ये सैटेलाइट्स निर्बाध संचार सुनिश्चित करेंगे।
अन्वेषण के मोर्चे पर प्रस्तावित शुक्र ऑर्बिटर मिशन (Venus Orbiter Mission) पृथ्वी के निकटतम ग्रह शुक्र के रहस्यों को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। इन सभी पहलों से स्पष्ट है कि ISRO की रणनीति अवलोकन, नेविगेशन, संचार और ग्रह विज्ञान को एकीकृत करते हुए भारत की अंतरिक्ष क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की है।
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