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Saturday, October 31, 2026
होमन्यूज़ अपडेट“मोदी के नेतृत्व में भारत पर प्रतिबंधों का दबाव निष्फल साबित होगा”

“मोदी के नेतृत्व में भारत पर प्रतिबंधों का दबाव निष्फल साबित होगा”

मोदी सरकार की विदेश नीति की पुतिन ने की सराहना

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले भारत पर प्रतिबंधों के जरिए दबाव बनाने का कोई भी प्रयास कभी सफल नहीं होगा, बल्कि उसका उल्टा असर होगा। उन्होंने नई दिल्ली की रणनीतिक स्वायत्तता (स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी) का समर्थन किया और इस बात पर जोर दिया कि संप्रभु राष्ट्रों को अपने रक्षा और आर्थिक भागीदार चुनने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) में ‘इंडिया टुडे’ की ग्रुप एडिटर गीता मोहन के सवालों का जवाब देते हुए पुतिन ने कहा कि भारत ने लगातार अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप नीतियां अपनाई हैं और रूस के साथ अपने संबंधों को लेकर बाहरी दबाव के बावजूद भारत भविष्य में भी ऐसा करना जारी रखेगा।

“भारत हमेशा एक संप्रभु देश के रूप में व्यवहार करता है और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रतिबंधों की कोई भी संभावित धमकी तुरंत निष्प्रभावी हो जाएगी,” पुतिन ने यह विश्वास व्यक्त किया।

पुतिन ने खुलासा किया कि रूस ने पहले भारत के साथ एसयू-57 (Su-57) लड़ाकू विमानों से जुड़े एक संयुक्त कार्यक्रम का प्रस्ताव रखा था, लेकिन वह सहयोग धरातल पर नहीं उतर पाया, जिसके कारण अंततः रूस ने इस विमान को स्वतंत्र रूप से विकसित किया। पुतिन ने कहा, “Su-57 एक बहुत ही बेहतरीन विमान है, शायद इस समय दुनिया का सबसे आधुनिक और उन्नत विमान है। हमने इसे मिलकर बनाने का प्रस्ताव दिया था। बेशक, वह बात नहीं बन पाई, लेकिन हमने इसे खुद तैयार किया और अब हम Su-57 बेचने के लिए तैयार हैं।”

पुतिन ने भारत-रूस रक्षा सहयोग को अद्वितीय बताया, क्योंकि यह केवल खरीद-बिक्री के लेनदेन तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “भारतीय मित्रों के साथ हमारे संबंध अनूठे हैं, क्योंकि हमारे बीच आपसी विश्वास के कारण हम केवल व्यापार या सिर्फ खरीद-बिक्री पर ध्यान केंद्रित नहीं करते हैं।” हम संयुक्त अनुसंधान (रिसर्च) और विकास (डेवलपमेंट) पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, पुतिन ने ब्रह्मोस सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल कार्यक्रम का जिक्र किया, जिसे भारतीय और रूसी विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से विकसित किया है और यह दोनों देशों के बीच सबसे सफल रक्षा सहयोगों में से एक साबित हुआ है।

यह पूछे जाने पर कि क्या Su-57 या S-500 जैसी रूसी रक्षा प्रणालियों को खरीदने पर भारत को अमेरिका से प्रतिबंधों के दबाव का सामना करना पड़ सकता है, पुतिन ने कहा कि नई दिल्ली ने लगातार राष्ट्रीय हितों के मार्गदर्शन में एक स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई है। पुतिन ने कहा, “भारत एक संप्रभु देश है और उन्हें अपने लिए सबसे आधुनिक और सबसे उपयुक्त लगने वाले उत्पादों को चुनने की पूरी स्वतंत्रता है।”

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