राजेश कुमार सिंह को DRDO प्रमुख का अतिरिक्त प्रभार, रक्षा सचिव के साथ निभाएंगे दोहरी जिम्मेदारी

डॉ. समीर वी. कामत का कार्यकाल 31 मई को समाप्त, स्थायी नियुक्ति तक रक्षा सचिव संभालेंगे DRDO और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग की कमान

राजेश कुमार सिंह को DRDO प्रमुख का अतिरिक्त प्रभार, रक्षा सचिव के साथ निभाएंगे दोहरी जिम्मेदारी

Rajesh Kumar Singh has been given the additional charge of DRDO chief and will hold dual responsibilities along with that of Defence Secretary.

भारत के रक्षा अनुसंधान प्रतिष्ठान में नेतृत्व परिवर्तन के बीच केंद्र सरकार ने रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है। यह निर्णय वर्तमान DRDO अध्यक्ष डॉ. समीर कामत के विस्तारित कार्यकाल की समाप्ति के बाद लिया गया है, जो 31 मई 2026 को समाप्त हो रहा है।

कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, राजेश कुमार सिंह अपने मौजूदा रक्षा सचिव पद के साथ-साथ रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के अध्यक्ष की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी संभालेंगे। आदेश में कहा गया है कि सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद यह व्यवस्था लागू की गई है ताकि देश के प्रमुख रक्षा अनुसंधान संस्थान में नेतृत्व की निरंतरता बनी रहे।

डॉ. समीर कामत को वर्ष 2022 में DRDO का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। अपने कार्यकाल के दौरान उन्हें दो बार एक-एक वर्ष का सेवा विस्तार दिया गया था। उनके नेतृत्व में स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी और सैन्य अनुसंधान से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आगे बढ़े। अब उनके कार्यकाल की औपचारिक समाप्ति के बाद सरकार ने अंतरिम व्यवस्था के तहत यह जिम्मेदारी राजेश कुमार सिंह को सौंपी है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब DRDO कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम कर रहा है और सरकार नहीं चाहती कि नेतृत्व परिवर्तन के कारण किसी भी परियोजना की गति प्रभावित हो। स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने तक यह व्यवस्था जारी रहेगी।

राजेश कुमार सिंह की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत रक्षा आधुनिकीकरण, स्वदेशी हथियार प्रणालियों के विकास और रणनीतिक क्षमता विस्तार पर विशेष ध्यान दे रहा है। रक्षा सचिव और DRDO अध्यक्ष की दोहरी भूमिका उन्हें रक्षा नीति निर्माण और तकनीकी अनुसंधान के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में स्थापित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे रक्षा योजनाओं और अनुसंधान प्राथमिकताओं के बीच बेहतर समन्वय संभव हो सकता है।

इसी क्रम में केंद्र सरकार ने अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक और प्रशासनिक पदों पर भी अतिरिक्त प्रभार से जुड़े आदेश जारी किए हैं। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की महानिदेशक तथा वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग की सचिव एन. कलैसेल्वी को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। यह निर्णय वर्तमान सचिव एम. रविचंद्रन के 31 मई को सेवानिवृत्त होने के बाद लिया गया है।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय जलवायु अनुसंधान, समुद्री अध्ययन और आपदा पूर्वानुमान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कार्य करता है। ऐसे में सरकार ने वहां भी प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के लिए यह अंतरिम व्यवस्था की है।

इसके अलावा अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के सचिव श्रीवत्स कृष्णा को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। यह जिम्मेदारी आयोग की सचिव अलका उपाध्याय के 31 मई को सेवानिवृत्त होने के बाद सौंपी गई है।

विश्लेषकों का मानना है कि सरकार विभिन्न मंत्रालयों और संस्थानों में वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां देकर नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया को सुचारु बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है। वहीं DRDO में राजेश कुमार सिंह की भूमिका पर रणनीतिक और रक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों की विशेष नजर रहेगी, क्योंकि संगठन भारत की आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक विकसित करने की दिशा में केंद्रीय भूमिका निभाता है।

आने वाले महीनों में DRDO की प्रमुख परियोजनाओं, स्वदेशी रक्षा प्रणालियों और तकनीकी नवाचार कार्यक्रमों की प्रगति के बीच राजेश कुमार सिंह का नेतृत्व महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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