2022 में उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल साहू की नृशंस हत्या पर आधारित फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ की रिलीज को लेकर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर लगी अंतरिम रोक को फिलहाल बरकरार रखा है, जबकि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की एक पांच सदस्यीय जांच समिति ने फिल्म में छह महत्वपूर्ण बदलाव करने की सिफारिश की है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती:
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सोमवार (21 जुलाई) को सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह मंत्रालय की समिति द्वारा सुझाए गए बदलावों की रिपोर्ट याचिकाकर्ताओं को सौंपे। अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी और तब तक फिल्म की रिलीज पर रोक जारी रहेगी।
सूचना मंत्रालय द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर गठित की गई समिति ने फिल्म के कई हिस्सों पर आपत्ति जताई है और निम्नलिखित बदलाव सुझाए हैं:
- डिस्क्लेमर में बदलाव – फिल्म की मंशा और तथ्यात्मकता स्पष्ट करने के लिए डिस्क्लेमर में जरूरी संशोधन।
- वॉयस ओवर जोड़ने की सलाह – कुछ दृश्यों में सही संदर्भ देने हेतु।
- कुछ क्रेडिट फ्रेम हटाने – जिससे भ्रम की स्थिति न बने।
- AI-जनरेटेड सीन में बदलाव – खासकर सऊदी अरब की पारंपरिक पगड़ी से जुड़ा एक दृश्य।
- ‘नूपुर शर्मा’ का प्रतीकात्मक नाम बदलने की सिफारिश – वर्तमान में फिल्म में उनका नाम “नूतन शर्मा” दिखाया गया है, जिसे बदलने और उनका डायलॉग “मैंने तो वही कहा है जो उनके धर्म ग्रंथों में लिखा है” को हटाने की सलाह दी गई है।
- बलूची समुदाय से जुड़े तीन डायलॉग हटाने – जिनमें “हाफिज, बलूची कभी वफादार नहीं होता”, “मकबूल बलूची की…”, और “क्या बलूची, क्या अफगानी, क्या हिंदुस्तानी, क्या पाकिस्तानी” जैसे संवाद शामिल हैं।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि केंद्र सरकार ने इन सुझावों को स्वीकार कर आदेश जारी कर दिया है। इस फिल्म के खिलाफ जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने याचिका दायर करते हुए दावा किया था कि फिल्म का कथित तौर पर “सांप्रदायिक तनाव भड़काने वाला कंटेंट” सामाजिक सौहार्द बिगाड़ सकता है।
गौरतलब है कि सेंटर बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने पहले ही इस फिल्म को 50 से अधिक कट के बाद पास किया था, लेकिन याचिकाकर्ताओं का दावा है कि कुछ हिस्से अब भी आपत्तिजनक हैं और “समुदाय विशेष को निशाना बनाते हैं।”
‘उदयपुर फाइल्स’ में विजय राज, रजनीश दुग्गल और प्रीति झांगियानी जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म 11 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी, लेकिन कानूनी अड़चनों और सेंसर बोर्ड के बाद अब सुप्रीम कोर्ट की रोक के कारण इसकी रिलीज अनिश्चित बनी हुई है।
यह मामला न सिर्फ रचनात्मक स्वतंत्रता बनाम सामाजिक जिम्मेदारी की बहस को जन्म दे रहा है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि क्या वास्तविक घटनाओं पर आधारित फिल्मों को सेंसर की कसौटी पर परखा जाना चाहिए या नहीं। अब सबकी नजर 24 जुलाई को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि फिल्म में सुझाए गए बदलावों के बाद उसे रिलीज़ की अनुमति मिलती है या नहीं।
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