पंजाब पुलिस ने पठानकोट के एक युवक को पाकिस्तान के लिए कथित जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी इंटरनेट आधारित CCTV कैमरे के जरिए राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर सेना और अर्धसैनिक बलों की गतिविधियों पर नजर रख रहा था और उसकी लाइव फुटेज पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स को भेजी जा रही थी।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान बलजीत सिंह के रूप में हुई है, जो पठानकोट के चक्क धारीवाल गांव का निवासी बताया गया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि उसने NH-44 पठानकोट-जम्मू हाईवे पर एक पुल के पास स्थित दुकान में इंटरनेट कनेक्टेड CCTV कैमरा लगाया था।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह कैमरा रणनीतिक रूप से ऐसे स्थान पर लगाया गया था, जहां से सेना और अर्धसैनिक बलों के वाहनों की आवाजाही पर नजर रखी जा सके। आरोप है कि आरोपी इस कैमरे की लाइव फीड पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स तक पहुंचा रहा था।
पूछताछ के दौरान बलजीत सिंह ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने जनवरी महीने में यह कैमरा लगाया था। पुलिस का दावा है कि उसे दुबई में मौजूद एक अज्ञात व्यक्ति से निर्देश मिल रहे थे। जांच एजेंसियों के अनुसार इस काम के बदले आरोपी को 40 हजार रुपये भी दिए गए थे।
🔴The Punjab Police, in coordination with central security agencies, have arrested Baljit Singh (alias Bittu) for setting up an unauthorized cross-border surveillance system along the strategic Pathankot-Jammu National Highway (NH-44).
➡️Operating under instructions from a… pic.twitter.com/tqkQUj8Kb3— Defence News Of INDIA (@DefenceNewsOfIN) May 22, 2026
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से CCTV कैमरा और उससे जुड़े तकनीकी उपकरण बरामद किए हैं। अब सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपी का नेटवर्क कितना बड़ा था और क्या वह किसी संगठित जासूसी मॉड्यूल का हिस्सा था।
इस मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता इसलिए भी बढ़ा दी है क्योंकि पिछले महीने भी पंजाब पुलिस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI समर्थित दो जासूसी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था। उन मामलों में चीन निर्मित सोलर-पावर्ड हाईटेक CCTV कैमरों का इस्तेमाल संवेदनशील सैन्य ठिकानों की लाइव फुटेज पाकिस्तान भेजने के लिए किया जा रहा था।
जांच एजेंसियों का मानना है कि हाल के वर्षों में सीमा से सटे इलाकों में तकनीकी उपकरणों के जरिए जासूसी के प्रयास बढ़े हैं। इंटरनेट आधारित कैमरे, ड्रोन और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर संवेदनशील सूचनाएं जुटाने की कोशिशें की जा रही हैं।
फिलहाल पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां आरोपी से पूछताछ कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले में विदेशी संपर्कों, फंडिंग चैनल और संभावित सहयोगियों की भी जांच की जाएगी। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपी ने कितने समय तक सेना की गतिविधियों की जानकारी साझा की।
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