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Wednesday, March 25, 2026
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पश्चिम एशिया संघर्ष पर लोकसभा को संबोधित करेंगे प्रधानमंत्री मोदी!  

बैठक में पूरे देश में आवश्यक सेवाओं में किसी भी प्रकार की बाधा को रोकने के लिए आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने, लॉजिस्टिक्स को स्थिर रखने और वितरण प्रणाली को मजबूत करने पर जोर दिया गया। 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार दोपहर 2 बजे लोकसभा को संबोधित करेंगे, जिसमें वह पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। इससे पहले रविवार को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोलियम, कच्चे तेल, गैस, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।

इस बैठक का उद्देश्य पश्चिम एशिया में विकसित हो रहे संकट के बीच निर्बाध आपूर्ति और स्थिर वितरण सुनिश्चित करना था। बैठक में पूरे देश में आवश्यक सेवाओं में किसी भी प्रकार की बाधा को रोकने के लिए आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने, लॉजिस्टिक्स को स्थिर रखने और वितरण प्रणाली को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

अधिकारियों ने प्रधानमंत्री को ईंधन की उपलब्धता की वर्तमान स्थिति और भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।

सूत्रों के अनुसार, सरकार वैश्विक घटनाक्रम पर करीबी नजर रखे हुए है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव का असर उपभोक्ताओं और उद्योगों पर न पड़े, इसके लिए सक्रिय कदम उठाए गए हैं। बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच पर्याप्त भंडार बनाए रखने और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के प्रयास जारी हैं।

यह समीक्षा ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार दबाव में हैं। यह क्षेत्र वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मुख्य शिपिंग मार्गों में व्यवधान को लेकर भी चिंता जताई गई, खासकर होमुर्ज जलडमरू मध्य को लेकर, जहां से वैश्विक ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है।

एक दिन पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपित से बातचीत की थी और क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा करते हुए शांति और स्थिरता की आवश्यकता पर जोर दिया था। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को खुला और सुरक्षित बनाए रखने के महत्व को भी रेखांकित किया था और चेतावनी दी कि किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित कर सकता है।

मध्य पूर्व पर निर्भरता कम करने के लिए, भारत ने अपने तेल और गैस आयात के स्रोतों में विविधता लाई है और अमेरिका, रूस व नाइजीिरया जैसे देशों से खरीद बढ़ाई है। अब भारत के लगभग 70 प्रतिशत तेल आयात खाड़ी क्षेत्र के बाहर के स्रोतों से आते हैं।

सरकार ने एलपीजी आपूर्ति प्रबंधन के प्रयास भी तेज किए हैं, जिसमें संभावित कमी को दूर करने के लिए अमेरिका से तरलीकृत पेट्रोलियम गैस की खरीद शामिल है। हालांकि एलपीजी उपलब्धता को लेकर कुछ चिंताएं बनी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि उपभोक्ता स्तर पर आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आई है और ऑनलाइन बुकिंग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।

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