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Thursday, May 21, 2026
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ईरान ने इजरायल पर दागीं संदेशे में लिपटी बैलिस्टिक मिसाइलें!

अंग्रेजी और फारसी भाषाओं में उनका बयान 'से नो टू वार' अंकित है। अंग्रेजी में लिखा है 'थैंक्यू प्राइम मिनिस्टर' साथ ही ये भी कि ये युद्ध न सिर्फ 'अमानवीय' है बल्कि 'अवैध' भी है।

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यूएस-इजरायल संघर्ष के 24वें दिन चर्चा में ईरान का वो संदेश है जो हथियारों पर लिखकर दुश्मन देश तक पहुंचाया गया। रविवार को ईरान ने इजरायल के बड़े शहरों को निशाना बनाया। जिन बैलिस्टिक मिसाइल्स का प्रयोग किया गया, वे संदेशे में लिपटी थीं। ईरानी स्टेट मीडिया ने इसकी जानकारी दी है।

तस्नीम और मेहर न्यूज एजेंसी ने कुछ पोस्टर प्रकाशित किए। इनमें से एक पर स्पेनिश पीएम पेड्रो सांचेज की तस्वीर चस्पा है। अंग्रेजी और फारसी भाषाओं में उनका बयान ‘से नो टू वार’ अंकित है। अंग्रेजी में लिखा है ‘थैंक्यू प्राइम मिनिस्टर’ साथ ही ये भी कि ये युद्ध न सिर्फ ‘अमानवीय’ है बल्कि ‘अवैध’ भी है।

मेहर न्यूज एजेंसी ने जो खबर प्रकाशित की है उसमें आईआरजीसी सैन्यकर्मी मिसाइलों पर स्टिकर लगाते देखे जा सकते हैं। दरअसल, हाल ही में सांचेज ने कहा था कि स्पेन की नीति ‘युद्ध के खिलाफ’ है। उन्होंने अमेरिका-इजरायल हमलों को ‘गैरकानूनी’ और ‘खतरनाक’ बताया था।

कथित तौर पर ईरान के सैनिकों ने इन मिसाइलों को लॉन्च करते समय नारे भी लगाए। इससे साफ है कि यह सिर्फ हमला नहीं, बल्कि एक तरह का संदेश देने की कोशिश भी थी कि दुनिया के कुछ मुल्क ईरान के साथ हैं, संघर्ष अमानवीय है, यूरोप इन हमलों से खुश नहीं है, और युद्ध मसले का हल नहीं है।

संघर्ष शुरू होने के बाद स्पेन ने अमेरिका को अपने ‘रोटा नेवल बेस’ और ‘मोरन एयर बेस’ का इस्तेमाल करने से मना कर दिया था। इससे नाराज होकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पेन को व्यापारिक रिश्ते खत्म करने की धमकी दी। हाल ही में ब्रसेल्स में हुए यूरोपीय संघ के शिखर सम्मेलन में भी सांचेज ने दोहराया कि यह जंग पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए सही नहीं है।

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईएई) प्रमुख फातिह बिरोल ने इस संघर्ष को दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा में कहा कि अभी का हाल बहुत खराब है।

यह ऐसा है जैसे एक साथ कई तेल और गैस का संकट एक साथ चल रहा है। अगर हालात ऐसे ही रहे, तो दुनिया का कोई भी देश इससे बच नहीं पाएगा। इस लड़ाई में कई तेल और गैस से जुड़े ठिकानों पर हमले हुए हैं, जिससे सप्लाई पर असर पड़ा है।
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