ललन सिंह ने कहा, “यह सब बिना मतलब की बातें हैं। पार्टी में कोई मतभेद नहीं है। पार्टी एकजुट है।” उन्होंने जदयू की कार्यप्रणाली का उल्लेख करते हुए कहा कि 1994 में नीतीश कुमार द्वारा समता पार्टी के गठन के समय से ही संगठन में आंतरिक लोकतंत्र, आपसी सहमति और विचार-विमर्श की परंपरा रही है और आज भी उसी के अनुसार काम हो रहा है।
उन्होंने कहा कि विधायकों के लिए आयोजित प्रबोधन कार्यक्रम की उन्हें पहले से जानकारी नहीं थी, क्योंकि उस समय उनका कार्यक्रम गुजरात में था। कई विधायकों के फोन आने पर उन्होंने अपनी स्थिति बताई। बाद में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और जदयू के वरिष्ठ नेता संजय झा से उनकी बातचीत हुई। संजय झा ने उन्हें बताया कि यह नए निर्वाचित विधायकों के लिए सामान्य प्रबोधन कार्यक्रम है।
ललन सिंह ने कहा कि संजय झा से उनकी बातचीत होती रहती है और पार्टी में किसी तरह का विवाद नहीं है। वहीं, जदयू विधायक श्याम रजक ने भी पार्टी में किसी तरह के बवाल से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पार्टी पूरी तरह मजबूत है और विधान परिषद के स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए पार्टी ने अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं।
उन्होंने अपने समर्थकों से नीरज कुमार के बजाय अनुज सिंह का समर्थन करने की अपील की है। अनंत सिंह के इस रुख के बाद पार्टी के भीतर इसे लेकर चर्चा तेज हुई है। हालांकि, जदयू के वरिष्ठ नेताओं की ओर से लगातार संगठन में एकजुटता और आधिकारिक उम्मीदवार के समर्थन की बात कही जा रही है। ललन सिंह ने नीरज कुमार से जुड़े सवाल पर कहा कि नीरज कुमार के संबंध में उनसे ही पूछा जाना चाहिए।




