पश्चिम बंगाल की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट (SIR) से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि जांच प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा को अनुमति नहीं दी जाएगी। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि जहां सुधार की आवश्यकता होगी, वहां अदालत आदेश जारी करेगी, लेकिन SIR की प्रक्रिया में कोई अवरोध स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने दो टूक कहा, “यह सभी राज्यों को समझना होगा।”
सुनवाई के दौरान CJI ने टिप्पणी की, यदि अधिकारियों की सूची 5 फरवरी तक जमा कर दी गई होती, तो चुनाव आयोग (ECI) अब तक इस पर निर्णय ले चुका होता। अदालत के समक्ष सबसे बड़ा विवाद अधिकारियों के नाम और विवरण जमा करने को लेकर सामने आया।
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि चुनाव आयोग ने राज्य सरकार से कभी अधिकारियों के नाम मांगे ही नहीं। इसके जवाब में वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि अब 8,500 अधिकारियों की सूची सौंप दी गई है और अदालत से इसे स्वीकार करने का आग्रह किया। इस पर CJI ने तुरंत सवाल उठाया कि क्या सूची में अधिकारियों के नाम, पदनाम और तैनाती स्थल शामिल हैं, और क्या वे अगले दिन संबंधित इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) को रिपोर्ट कर सकते हैं। दीवान ने इसका जवाब हां में दिया।
हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी. एस. नायडू ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि आयोग को नामों की कोई पूरी सूची नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि शनिवार (7 फरवरी) दोपहर 12:30 बजे जो दस्तावेज प्राप्त हुए, उनमें आवश्यक विवरण नहीं था। इस पर CJI ने चेतावनी दी कि अदालत तथ्यों को लेकर विवाद नहीं चाहती और यदि ऐसी स्थिति बनी रही तो मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से तलब किया जा सकता है।
अधिकारी तैनाती और देरी पर भी अदालत ने सवाल उठाए। CJI ने कहा कि नाम 4 या 5 फरवरी को ही दिए जा सकते थे, जबकि अब भी पूरी सूची उपलब्ध नहीं है।
मतदाता मैपिंग और तार्किक विसंगतियों (Logical Discrepancy) पर भी अदालत ने चिंता जताई है। CJI ने सवाल किया कि क्या लगभग 70 लाख मतदाता केवल वर्तनी की मामूली गलतियों के कारण इस श्रेणी में आ गए हैं। दीवान ने कहा कि 50 प्रतिशत से अधिक विसंगतियां स्पेलिंग एरर के कारण हैं। सुनवाई के दौरान अदालत में अनुशासन को लेकर भी सख्ती दिखाई गई। जब एक साथ कई पक्ष बोलने लगे, तो CJI ने नाराजगी जताते हुए कहा, “यह कोर्ट नंबर 1 है, कोई बाजार नहीं।”
दीवान ने अदालत को बताया कि पूरी प्रक्रिया 14 फरवरी तक पूरी करने का लक्ष्य है। उनके अनुसार ड्राफ्ट मतदाता सूची में लगभग 7.08 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें से 6.75 करोड़ की पहचान हो चुकी है, जबकि करीब 32 लाख मतदाता अभी चिन्हित किए जाने बाकी हैं। मामला पश्चिम बंगाल राज्य निर्वाचन आयोग और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान उठा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता, समयबद्धता और पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए किसी भी स्तर पर सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
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