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Saturday, October 24, 2026
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अरशद मदनी बोले, मुसलमान न झुका है और न झुकेगा कभी!

सत्ता में बैठे लोगों की जिम्मेदारी हर नागरिक के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है, न कि किसी विशेष वर्ग के खिलाफ नफरत और विभाजन की राजनीति करना।"

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जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने कहा है कि देश को योजनाबद्ध तरीके से एक वैचारिक राष्ट्र में बदलने की कोशिश की जा रही है। मदनी ने कहा कि पहले केवल मुसलमान निशाने पर थे। अब इस्लाम को भी निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुसलमान न कभी झुका है और न कभी झुकेगा।

अरशद मदनी ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जमीयत उलमा-ए-हिंद की कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक का घोषणापत्र जारी किया।

मदनी ने कहा, “देश के वर्तमान हालात, बढ़ती सांप्रदायिकता, संवैधानिक संस्थाओं की चुप्पी, मुसलमानों और इस्लामी प्रतीकों के खिलाफ बढ़ते कदम तथा नफरत आधारित राजनीति अत्यंत चिंताजनक है। हालांकि मुसलमान न कभी झुका है और न कभी झुकेगा। वह प्रेम से झुक सकता है, लेकिन ताकत, धमकी और अत्याचार के सामने उसे कभी झुकाया नहीं जा सकता।”

मदनी ने पोस्ट में लिखा, “देश में नफरत की राजनीति अब धमकी की राजनीति में बदल चुकी है, जिसका उद्देश्य मुसलमानों को भयभीत करके उन्हें अपनी शर्तों पर जीवन बिताने के लिए मजबूर करना है। सत्ता प्राप्ति के लिए अमन और एकता के साथ खतरनाक खिलवाड़ किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप धार्मिक उन्माद और नफरत लगातार बढ़ रही है, जबकि कानून के रखवाले मूकदर्शक बने हुए हैं।

हालिया चुनावों के बाद कुछ राजनीतिज्ञों में नफरत के आधार पर सत्ता हासिल करने का चलन और बढ़ गई है। बहुसंख्यक समुदाय को अल्पसंख्यकों के विरुद्ध खड़ा करने के लिए धार्मिक भावनाओं को भड़काया जा रहा है, जबकि सरकारें भय और धमकी से नहीं बल्कि न्याय और इंसाफ से चलती हैं।”

अरशद मदनी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के बयान का जिक्र किया। मदनी ने कहा, “पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री का यह बयान कि वे ‘सिर्फ हिंदुओं के लिए काम करेंगे’ संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के पूरी तरह विरुद्ध है, क्योंकि हर मुख्यमंत्री शपथ लेकर सभी नागरिकों के साथ न्याय करने का संकल्प लेता है।

सत्ता में बैठे लोगों की जिम्मेदारी हर नागरिक के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है, न कि किसी विशेष वर्ग के खिलाफ नफरत और विभाजन की राजनीति करना।”

इसके साथ ही, मदनी ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “देश को योजनाबद्ध तरीके से एक वैचारिक राष्ट्र में बदलने की कोशिश की जा रही है। समान नागरिक संहिता, वंदे मातरम को अनिवार्य बनाना, मस्जिदों और मदरसों के खिलाफ कार्रवाइयां व एसआईआर की आड़ में वास्तविक नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने जैसे कदम इसी सिलसिले की कड़ियां हैं।” मदनी ने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद इन सभी कदमों के खिलाफ अपनी कानूनी और लोकतांत्रिक लड़ाई जारी रखेगी।

मदनी ने यह भी कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने भी मुसलमानों को सामाजिक, शैक्षिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाया, लेकिन आज हालात उससे कहीं अधिक गंभीर हो चुके हैं। पहले केवल मुसलमान निशाने पर थे।

अब इस्लाम को भी निशाना बनाया जा रहा है। अरशद मदनी ने कहा, “वर्ष 2014 के बाद बनाए गए कानूनों और हालिया कदमों इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि वर्तमान सरकार केवल मुसलमानों ही नहीं, बल्कि इस्लाम को भी नुकसान पहुंचाना चाहती है।”

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष ने अपने पोस्ट के आखिर में लिखा, “हम सभी न्यायप्रिय दलों, सामाजिक संगठनों और देशहित में सोचने वाले नागरिकों से अपील करते हैं कि वे एकजुट होकर सांप्रदायिक और फासीवादी ताकतों का लोकतांत्रिक और सामाजिक स्तर पर मुकाबला करें व देश में भाईचारा, सहिष्णुता, न्याय और संविधान की सर्वोच्चता के लिए संयुक्त संघर्ष करें।”

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