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बांग्लादेश ने इस्कॉन के 50 से अधिक सदस्यों को भारत आने से रोका?

बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद से हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले की घटनाएं बढ़ गई हैं| बांग्लादेश में हिंदुओं ने कई बार इसका विरोध किया|

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बांग्लादेश में इस्कॉन को लेकर भारी बवाल मचा हुआ है​|​ ऐसे में इस्कॉन कोलकाता समेत कई बांग्लादेशी मीडिया ने खबर दी है कि भारत आ रहे इस्कॉन के 50 से ज्यादा सदस्यों को बांग्लादेश प्रशासन ने रोक दिया है​|​ मीडिया में कहा गया कि सभी वैध दस्तावेज होने के बावजूद इस्कॉन सदस्यों को भारत में प्रवेश करने से रोका गया। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि इस्कॉन के 63 सदस्यों को बांग्लादेशी अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बेनापोल बंदरगाह पर संदिग्ध गतिविधियों के लिए रोका था।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “बांग्लादेश से मिली खबरों के मुताबिक, विभिन्न जिलों से 63 इस्कॉन सदस्य भारत में प्रवेश करने के लिए शनिवार शाम और रविवार सुबह बेनापोल बंदरगाह पर पहुंचे थे, लेकिन संदिग्ध गतिविधि के कारण आव्रजन पुलिस ने उन्हें रोक दिया।”

बांग्लादेशी पुलिस ने क्या कहा?: बांग्लादेशी मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, इमीग्रेशन चेक-पोस्ट अधिकारी इम्तियाज मोहम्मद अहसानुल ने कहा, “हमने 54 बांग्लादेशी यात्रियों को भारत आने के उनके संदिग्ध इरादों के कारण यात्रा की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।”इस समय इम्तियाज मोहम्मद अहसानुल ने इस्कॉन के अन्य 9 सदस्यों का जिक्र नहीं किया जिन्हें यात्रा करने से रोका गया था|

इसे किस आधार पर खारिज किया जा रहा है?: इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष राधारमण दास के मुताबिक, ”बांग्लादेशी पुलिस ने भारतीय सीमा पर जिन लोगों को रोका, वे बांग्लादेश के अलग-अलग हिस्सों से आए इस्कॉन के सदस्य थे। बांग्लादेश की स्थिति के कारण उन्होंने तीर्थयात्रा के लिए भारत आने का फैसला किया। लेकिन बांग्लादेशी पुलिस ने शनिवार को 9 सदस्यों को और रविवार को 54 और सदस्यों को सीमा पर रोक लिया। वैध वीजा और अन्य वैध दस्तावेज होने के बावजूद उन्हें किस आधार पर दूसरे देश की यात्रा करने की अनुमति नहीं दी जा रही है?

बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद से हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले की घटनाएं बढ़ गई हैं. बांग्लादेश में हिंदुओं ने कई बार इसका विरोध किया| हाल ही में चटगांव में हुए आंदोलन के दौरान बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने पर चिन्मय कृष्ण दास समेत 19 लोगों पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया था| इस मामले में चिन्मय कृष्ण दास को गिरफ्तार किया गया था| गिरफ़्तारियों के विरोध में हिंसा भड़क उठी, जिसमें एक वकील की मौत हो गई|

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