उमेश कुशवाहा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर दो टूक लिखा, “जेडीयू मतलब नीतीश कुमार।” खगड़िया में आयोजित ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ कार्यक्रम का जिक्र करते हुए उमेश कुशवाहा ने कहा कि राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने पार्टी के नाम को नीतीश कुमार के नाम से जोड़ने को लेकर जो भावना व्यक्त की, वह जदयू के प्रत्येक कार्यकर्ता के अंतर्मन की आवाज है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार पार्टी के सर्वमान्य नेता हैं और वही जदयू की सबसे बड़ी पूंजी हैं।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि नीतीश कुमार के अथक परिश्रम, संघर्ष और खून-पसीने से जदयू का संगठन खड़ा हुआ है। उनके आदर्शों, सिद्धांतों और विचारधारा से प्रेरित होकर पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता ‘न्याय के साथ विकास’ के संकल्प को आत्मसात करते हुए विकसित बिहार के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।
उमेश कुशवाहा ने यह भी स्पष्ट किया कि संजय झा की इस भावना के साथ जदयू के कार्यकर्ता पूरी दृढ़ता से खड़े हैं और इसमें किसी तरह के किंतु-परंतु की गुंजाइश नहीं है। इससे पहले बिहार सरकार के मंत्री और जदयू नेता श्रवण कुमार भी इस प्रस्ताव के समर्थन में उतर चुके हैं।
बता दें कि जदयू के इस रुख पर राजद ने तीखा हमला बोला है। राजद नेता भाई वीरेंद्र ने तंज कसते हुए कहा कि पार्टी को बर्बाद करने वाले लोग ही अब उसका नाम बदलने की बात कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अगले एक-दो महीने में जदयू पूरी तरह टूट जाएगी और जब पार्टी में दो-चार लोग ही बचेंगे, तब उसका नाम ‘जनता दल नीतीश’ रख दिया जाएगा।
नीतीश कुमार के नाम को जदयू के नाम से जोड़ने की मांग ऐसे समय सामने आई है, जब पार्टी संगठन और नेतृत्व में मुख्यमंत्री की भूमिका को लगातार केंद्र में रखा जा रहा है। संजय झा के प्रस्ताव के बाद उमेश कुशवाहा और श्रवण कुमार का समर्थन और राजद की तीखी प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को बिहार की राजनीति में नया सियासी रंग दे दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि पार्टी के भीतर उठी यह मांग आगे औपचारिक प्रस्ताव का रूप लेती है या नहीं।



