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छगन भुजबल ने ली मंत्री पद की शपथ

शपथग्रहण राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन ने राजभवन में आयोजित एक सादे मगर अहम समारोह में दिलाई।

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मंगलवार (20 मई) को महाराष्ट्र प्रदेश सरकार में वरिष्ठ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता और समता परिषद के संस्थापक छगन भुजबल ने राज्य मंत्री परिषद में मंत्री पद की शपथ ली। यह शपथग्रहण राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन ने राजभवन में आयोजित एक सादे मगर अहम समारोह में दिलाई। समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री अजित पवार, मंत्रीगण और एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

शपथ ग्रहण के बाद छगन भुजबल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री फडणवीस, उपमुख्यमंत्रियों, एनसीपी नेताओं सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल सहित अपने निर्वाचन क्षेत्र, समता परिषद और पार्टी कार्यकर्ताओं का आभार जताया। उन्होंने कहा, “मैं उन सभी लोगों का आभारी हूं जिन्होंने मुझे अब तक प्यार और समर्थन दिया।”

सूत्रों के अनुसार, भुजबल को खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग की जिम्मेदारी मिल सकती है—वही विभाग जिसे वह पहले उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे की सरकारों में संभाल चुके हैं।

भुजबल पिछले कुछ समय से पार्टी में उपेक्षा के कारण नाराज़ चल रहे थे। दिसंबर 2023 में जब मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ था, तब उन्हें शामिल नहीं किया गया था, जिससे वे सार्वजनिक रूप से नाराजगी जता चुके थे। उन्होंने पार्टी के कार्यक्रमों से दूरी बना ली थी और यहां तक कि विधानसभा चुनाव में ओबीसी मुद्दे को प्रमुखता देने के बावजूद खुद को नजरअंदाज किया गया बताकर असंतोष प्रकट किया था।

हालांकि, पार्टी अध्यक्ष अजित पवार और कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल के हस्तक्षेप के बाद बातचीत फिर से शुरू हुई और भुजबल को मंत्रिमंडल में जगह देने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। एनसीपी के लिए यह कदम राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है, खासकर तब जब एक अन्य ओबीसी नेता धनंजय मुंडे को हत्या के एक मामले में इस्तीफा देना पड़ा था। मुंडे के पास खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग था, जिसे बाद में उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने संभाला था।

अब जब सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को चार महीने में स्थानीय निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं, ऐसे समय में भुजबल का मंत्री बनना ओबीसी मतदाताओं को साधने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। मराठा आरक्षण मुद्दे के बीच भुजबल ओबीसी आरक्षण के मुखर समर्थक रहे हैं और जाति आधारित जनगणना की भी पैरवी करते रहे हैं।

एनसीपी ने भुजबल को पुनः सक्रिय करके एक अनुभवी, प्रभावशाली और मजबूत ओबीसी नेता को फिर से आगे लाकर चुनावी गणित को संतुलित करने की कोशिश की है।

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