उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को देवरिया में सलेमपुर और भाटपाररानी विधानसभा क्षेत्रों के विकास के लिए 305 करोड़ रुपये की 80 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी पर भ्रष्टाचार, परिवारवाद और सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए निशाना साधा।
सीएम योगी ने लखनऊ स्थित जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इसकी शुरुआती लागत करीब 200 करोड़ रुपये थी, लेकिन सपा सरकार के दौरान इस पर 864 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए और इसके बावजूद परियोजना अधूरी रही। उन्होंने कहा कि यह पैसा जनता का था, जिसे पानी की तरह बहाया गया।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि यदि वर्तमान सरकार जेपीएनआईसी पर आगे पैसा खर्च करती तो 150 से 200 करोड़ रुपये अतिरिक्त लगते। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 900 से 1000 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से खर्च करने के बाद इसे निजी कंपनी को सौंपने की तैयारी थी। योगी के मुताबिक, इस व्यवस्था में अखिलेश यादव, डिंपल यादव और धर्मेंद्र यादव से जुड़े लोग शामिल थे।
उन्होंने कहा कि 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद जेपीएनआईसी को लखनऊ विकास प्राधिकरण को सौंपा गया और जांच कराई गई। सरकार अब परियोजना पर अतिरिक्त धन खर्च करने के बजाय पहले खर्च हुए सरकारी धन को वापस सरकारी खजाने में लाने की दिशा में काम कर रही है।
योगी ने सपा को परिवार केंद्रित पार्टी बताते हुए कहा कि जिस धन से युवाओं को रोजगार, फ्लाईओवर, विश्वविद्यालय और इनोवेशन सेंटर मिल सकते थे, उसका दुरुपयोग किया गया।
मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले की कानून-व्यवस्था का भी जिक्र किया और दावा किया कि भाजपा सरकार में माफिया तथा अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हुई है। उन्होंने मुफ्त बस यात्रा योजना बताते हुए कहा कि 27 से 29 अगस्त तक महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा मिली और 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को भी यह सुविधा दी जाएगी।
रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने 45 हजार होमगार्ड, 36 हजार पुलिसकर्मियों और विभिन्न विभागों में करीब 30 हजार नियुक्तियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यूपीटीईटी उत्तीर्ण युवाओं के लिए भी जल्द भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
सीएम योगी ने कहा कि सरकार दो करोड़ युवाओं को टैबलेट देने के लक्ष्य पर काम कर रही है। उन्होंने इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण, गरीबों को राशन और आवास तथा देवरिया में मेडिकल कॉलेज जैसी उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब ‘बीमारू’ राज्य की पहचान से बाहर निकल चुका है।
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