इस मामले में एनआईए की विशेष अदालत का फैसला आया है, जिसमें भाजपा की पूर्व सांसद प्रज्ञा ठाकुर सहित सात आरोपियों को बरी कर दिया है। इस फैसले पर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा है कि मालेगांव की घटना पर जो फैसला आया है उससे यह बात स्पष्ट हो गई है कि कांग्रेस की सोची समझी साजिश के तहत हिंदुओं और भगवा को आतंकवादी बनाने के लिए जो षड्यंत्र रचा था उसका पर्दाफाश हो गया है।
उन्होंने आगे कहा कि दिग्विजय सिंह, मनमोहन सिंह की सरकार और सोनिया गांधी की मंडली ने देश के साधु-संतों को जानबूझकर निशाना बनाया।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सांसद रहीं प्रज्ञा ठाकुर भी इस मामले में एक आरोपी थीं। इस पर विधायक शर्मा ने कहा कि प्रज्ञा ठाकुर सहित तमाम लोगों को पीड़ा दी गई, जितनी यातनाएं दी गईं, सताया गया, इसके पीछे कांग्रेस का षड्यंत्र है।
उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि भगवा आतंकवाद जैसा शब्द इसलिए गढ़ा जाता है ताकि आतंकवादियों और नक्सलियों पर पर्दा डाला जा सके। अब दिग्विजय सिंह और चिदंबरम जैसे लोग जो गैर जिम्मेदाराना बयान देते है उनको माफी मांगनी चाहिए।
पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक अर्चना चिटनीस ने कहा कि जिन लोगों को 17 साल से प्रताड़ित किया था, उन्हें न्याय मिला है। देश की न्यायालयीन व्यवस्था पर श्रद्धा ऐसे फैसलों से और बढ़ती है। इसके साथ ही जो नेता गलत नैरेटिव बनाते हैं और बहुसंख्यकों को अपमानित करते हैं, उन लोगों के लिए यह फैसला उनके लिए सीख है और भगवान उन्हें सदबुद्धि दे।
पूर्व मंत्री और विधायक गोपाल भार्गव ने न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि प्रज्ञा सिंह ठाकुर हिंदुत्व की ध्वजा वाहक तो हो सकती है मगर आतंकवादी नहीं। राज्य सरकार के मंत्री गोविंद राजपूत ने न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस फैसले को अपील योग्य बताया है। इस पर राज्य की मंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि कांग्रेस की राजनीति हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति रही है। साथ ही एक विशेष वर्ग को सम्मान देने के लिए हिंदू धर्म को अपमानित करने का काम किया है।
दरअसल 17 साल पहले 2008 में मालेगांव में बम धमाका हुआ था। इस मामले पर एनआईए की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुनाया है। इस फैसले में भाजपा की पूर्व सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है।
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