डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जयंती के अवसर पर मंगलवार(14 अप्रैल) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। डॉ. भीमराव आंबेडकर के योगदान को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी।
इस पोस्ट में साझा किए गए एक वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज का दिन देश के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आंबेडकर केवल एक व्यक्ति नहीं थे, बल्कि एक संकल्प थे। बाबासाहेब ने अपना जीवन संघर्ष को समर्पित किया और समाज की कुरीतियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि बाबासाहेब ने अपने सम्मान या प्रतिष्ठा की परवाह किए बिना समाज के अंतिम पायदान पर खड़े दलित, पिछड़े, शोषित और वंचित वर्गों तक समानता और सम्मान पहुंचाने के लिए लगातार संघर्ष किया। अपमान सहने के बावजूद वे कभी अपने मार्ग से विचलित नहीं हुए।
2014 के बाद उनकी सरकार ने बाबासाहेब के विचारों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। महू स्थित जन्मस्थली, लंदन स्थित शिक्षा स्थल, दिल्ली स्थित महापरिनिर्वाण स्थल और नागपुर की दीक्षाभूमि का विकास कर उन्हें ‘पंचतीर्थ’ के रूप में विकसित किया गया है। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलते हुए देश तेजी से गरीब, दलित और वंचित वर्गों के जीवन में परिवर्तन ला रहा है।
भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर की जयंती पर मंगलवार को उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और कई अन्य नेताओं ने संसद परिसर में उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राज्यसभा सदस्य रामदास आठवले और कांग्रेस नेता उदित राज सहित अनेक गणमान्य लोग ‘भारतीय संविधान के शिल्पकार’ को श्रद्धांजलि देने के लिए उपस्थित रहे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। वर्तमान में वह गुजरात दौरे पर हैं और गांधीनगर स्थित लोकभवन में उन्होंने डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।
इस बीच, गृहमंत्री अमित शाह ने भी बाबासाहेब को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने हर वर्ग को समान अधिकार और अवसर देने वाला संविधान देकर भारतीय लोकतंत्र की मजबूत नींव रखी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आंबेडकर ने देश की अखंडता के लिए अनुच्छेद 370 का दृढ़ता से विरोध किया था। उनका जीवन हमें सिखाता है कि यदि देशसेवा और जनकल्याण का संकल्प हो, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।
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