बजट सत्र में 109.87 प्रतिशत कामकाज, 117 प्रश्न पूछे गए
खास बात यह रही कि इस दौरान राज्यसभा की उत्पादकता 109.87 प्रतिशत रही। शनिवार को समाप्त हुए बजट में कुल 117 प्रश्न पूछे गए, वहीं सदन में 446 शून्यकाल उल्लेख किए गए।
Team News Danka
Updated: Sat 18th April 2026, 04:22 PM
Budget Session: 109.87% Functioning; 117 Questions Asked. With the conclusion of the 270th session of the Rajya Sabha on Saturday, the Budget Session of Parliament also came to a close. During this Budget Session—which concluded on Saturday—the proceedings of the Rajya Sabha ran smoothly, and the session's productivity exceeded 100 percent. Over the entire duration of the session, the Rajya Sabha functioned for a total of 157 hours and 40 minutes. A notable highlight was that, during this period, the productivity of the Rajya Sabha stood at 109.87 percent. During the Budget Session, which ended on Saturday, a total of 117 questions were asked, while 446 'Zero Hour' mentions were raised in the House; additionally, 207 'Special Mentions' were presented by Rajya Sabha MPs. At the conclusion of the Budget Session, Vice President and Rajya Sabha Chairman C.P. Radhakrishnan expressed his gratitude to MPs from all political parties. He told the MPs, "You have enriched the proceedings of the House with your valuable insights." It is noteworthy that, among the three sessions of Parliament, the Budget Session holds special significance; not only is it the longest session, but it also plays a pivotal role in determining the direction of the country's development.
राज्यसभा के 270वें सत्र के समापन के साथ ही शनिवार को संसद के बजट सत्र का भी समापन हो गया। शनिवार को समाप्त हुए संसद के इस बजट सत्र में राज्यसभा का कामकाज सुचारू रूप से चला और सत्र की प्रोडक्टिविटी 100 फीसदी से भी अधिक रही। संपूर्ण सत्र के दौरान राज्यसभा ने कुल 157 घंटे 40 मिनट कार्य किया।
खास बात यह रही कि इस दौरान राज्यसभा की उत्पादकता 109.87 प्रतिशत रही। शनिवार को समाप्त हुए बजट में कुल 117 प्रश्न पूछे गए, वहीं सदन में 446 शून्यकाल उल्लेख किए गए। वहीं राज्यसभा सांसदों द्वारा 207 विशेष उल्लेख प्रस्तुत किए गए। बजट सत्र के समापन पर उपराष्ट्रपति व राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सभी दलों के सांसदों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने सांसदों से कहा कि आपने अपने बहुमूल्य विचारों से सदन की कार्यवाही को समृद्ध किया। गौरतलब है कि संसद के तीनों सत्रों में बजट सत्र का विशेष महत्व होता है। यह न केवल सबसे लंबा सत्र होता है, बल्कि देश की विकास दिशा तय करने में भी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस सत्र में पारित बजट, स्वीकृत नीतियां और निर्धारित प्राथमिकताएं देश के प्रत्येक नागरिक के जीवन को सीधे प्रभावित करती हैं। मौजूदा बजट सत्र वर्ष का सबसे लंबा सत्र है। बजट सत्र राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव से प्रारंभ हुआ था, जिस पर चार दिनों तक सदन में विस्तृत चर्चा हुई।
इस विस्तृत चर्चा में राज्यसभा के 79 सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसके बाद केंद्रीय बजट 2026-27 पर भी चार दिनों तक गंभीर और व्यापक चर्चा हुई, जिसमें 97 सदस्यों ने भाग लिया।
साथ ही, सरकार के दो महत्वपूर्ण मंत्रालयों के कार्यकलापों पर भी सार्थक चर्चा की गई। सदन ने वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर तथा विदेश मंत्री द्वारा पश्चिम एशिया की स्थिति पर दिए गए वक्तव्यों पर भी ध्यान दिया।
सभापति ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति और उससे उत्पन्न चुनौतियों, विशेषकर भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं पर दिए गए वक्तव्य ने स्थिति को स्पष्ट किया और राष्ट्रीय एकजुटता की आवश्यकता को रेखांकित किया।
सत्र समापन होने पर सभापति ने कहा, मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि इस सत्र के दौरान 50 निजी सदस्य विधेयक प्रस्तुत किए गए। 94 अवसरों पर माननीय सदस्यों ने संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 12 क्षेत्रीय भाषाओं में अपने विचार रखे।
इस सत्र में हरिवंश नारायण सिंह का राज्यसभा के उपसभापति के रूप में तीसरी बार निर्वाचन भी हुआ। प्रधानमंत्री सहित सभी दलों के नेताओं और सदस्यों ने उन्हें बधाई दी।
सभापति ने कहा कि वह सदन के सुचारू संचालन में सहयोग देने के लिए उपसभापति, उपसभापति पैनल के सदस्यों, सदन के नेता, विपक्ष के नेता, संसदीय कार्य मंत्रालय, विभिन्न दलों के नेताओं तथा सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हैं।
इसके साथ ही सभापति ने राज्यसभा के सदस्यों से कहा कि वह एक बार फिर सभी सदस्यों से अनुरोध करते हैं कि नियम 267 का उपयोग केवल आवश्यक परिस्थितियों में ही किया जाए, ताकि सदन का बहुमूल्य समय व्यर्थ न हो।