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Thursday, April 23, 2026
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भारत-आने वाला जहा ईरान ने किया जब्त, कूटनीतिक चिंता गहराई

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होर्मुज जलडमरूमध्य में एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां भारत की ओर जा रहे एक जहाज समेत दो वाणिज्यिक पोतों को ईरान ने जब्त कर लिया। इस घटना से भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पनामा-ध्वज वाले ‘MSC फ्रांसिस्का’ और लाइबेरिया-ध्वज वाले ‘एपामिनोड्स’ जहाजों को हिरासत में ले लिया है। इनमें से ‘एपामिनोड्स’ गुजरात के मुंद्रा पोर्ट की ओर जा रहा था और दुबई से रवाना हुआ था। इसके अलावा ग्रीस के स्वामित्व वाला ‘यूफोरिया’ नामक तीसरा जहाज भी निशाने पर आया और फिलहाल ईरान के तट के पास फंसा हुआ है।

ईरानी नौसेना का दावा है कि इन जहाजों के पास आवश्यक अनुमति नहीं थी और उन्होंने अपने नेविगेशन सिस्टम में छेड़छाड़ की थी, जिससे समुद्री सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हुआ।

इससे पहले यूके मरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने भी पुष्टि की थी कि होरमुज़ क्षेत्र में तीन व्यापारिक जहाजों पर हमला हुआ है। यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों पर भी असर पड़ रहा है।

Iran war

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले के दौरान एक जहाज के ब्रिज (कमांड सेंटर) को नुकसान पहुंचा, हालांकि किसी भी चालक दल के सदस्य के घायल होने की खबर नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई हाल ही में अमेरिका द्वारा ओमान की खाड़ी के पास दो ईरानी जहाजों को जब्त किए जाने के जवाब में की गई हो सकती है। अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी भी इस तनाव का एक प्रमुख कारण बन रही है।

इससे पहले भी पिछले सप्ताह दो भारतीय जहाज  ‘जग अर्णव’ और ‘सनमार हेराल्ड’ पर ईरानी नौसेना द्वारा फायरिंग की घटना सामने आई थी, जबकि ईरान ने “मित्र देशों” के जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने का आश्वासन दिया था।

इन घटनाओं के बाद भारत ने ईरानी दूत को तलब कर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की थी। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि ईरान में वास्तविक नियंत्रण किसके हाथ में है, क्योंकि कई रिपोर्ट्स में IRGC के प्रभावशाली भूमिका निभाने की बात कही गई है। यदि स्थिति जल्द नहीं संभली, तो इसका असर न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि भारत और ईरान के व्यापार कूटनीतिक सबंधों पर भी पड़ सकता है।

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