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ईस्टर का संदेश: राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री समेत तमाम नेताओं ने दी ईस्टर की शुभकामनाएं!

माना जाता है कि क्रूस पर चढ़ाए जाने के तीसरे दिन मसीह पुनर्जीवित हुए थे, और यह विश्वास ईसाई धर्म की नींव है।

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रविवार (20 अप्रैल)को जब देशभर में ईस्टर के उल्लास ने प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान की याद दिलाई, तब भारत की सियासी हस्तियों ने भी देशवासियों को इस पवित्र पर्व पर शुभकामनाएं दीं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई प्रमुख नेताओं ने ईस्टर को आशा, करुणा और नई शुरुआत का प्रतीक बताया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “सभी को ईस्टर की बधाई! इस अवसर पर हम ईसा मसीह के पुनरुत्थान का जश्न मनाते हैं। यह त्योहार नई उम्मीद और नई शुरुआत की भावना को प्रेरित करता है। ईसा मसीह की शिक्षाएं मानवता को प्रेम और त्याग के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं। आशा और आनंद का यह त्योहार सभी के लिए शांति और समृद्धि लाए।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने संदेश में इसी भावना को दोहराते हुए लिखा, “सभी को ईस्टर की हार्दिक शुभकामनाएं। यह ईस्टर इसलिए खास है क्योंकि दुनिया ईसा मसीह के जुबली वर्ष को बड़े उत्साह के साथ मना रही है। कामना है कि ये पवित्र अवसर हर व्यक्ति में आशा, नवीनीकरण और करुणा की भावना जगाए रखे। चारों ओर खुशियां और सद्भावना हो।”

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी पुनरुत्थान के गहरे प्रतीकवाद पर ज़ोर देते हुए लिखा, “ईस्टर के इस खुशी भरे अवसर पर हमारी हार्दिक शुभकामनाएं, जो एक बेहतर कल के लिए आशा के नवीनीकरण का प्रतीक है। यीशु मसीह के पुनरुत्थान का शाश्वत महत्व यह है कि करुणा घृणा से अधिक शक्तिशाली है और सत्य बुराई पर विजय प्राप्त करता है।”

राहुल गांधी और अशोक गहलोत जैसे नेताओं ने भी ईसा मसीह के प्रेम, सेवा और बलिदान के संदेश को आत्मसात करने की अपील की। गांधी ने लिखा, “यह खुशी का अवसर सभी के लिए नई शुरुआत, नई उम्मीद और स्थायी खुशी लेकर आए।” वहीं गहलोत ने कहा, “आइए इस पर्व के अवसर पर प्रभु यीशु की करुणा, मानवता तथा त्याग की शिक्षाएं आत्मसात कर उनसे सेवा तथा सद्भाव के मार्ग पर चलने की प्रेरणा लें।”

ईस्टर, ईसाई धर्म का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है, जो यीशु मसीह के पुनरुत्थान को स्मरण करता है। माना जाता है कि क्रूस पर चढ़ाए जाने के तीसरे दिन मसीह पुनर्जीवित हुए थे, और यह विश्वास ईसाई धर्म की नींव है। इस दिन को नई जिंदगी, आध्यात्मिक पुनरुत्थान और आत्मा की शुद्धि का प्रतीक माना जाता है।

परंपराओं के अनुसार ईस्टर से पहले 40 दिन का ‘लेंट’ उपवास चलता है, और फिर यह पर्व उल्लासपूर्ण प्रार्थनाओं, भजनों और प्रतीकात्मक अंडों से सजकर जीवन के उल्लास का उत्सव बन जाता है।

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