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संविधान हत्या दिवस: आपातकाल की निंदा में केंद्रीय मंत्रिमंडल का प्रस्ताव

मृतकों को श्रद्धांजलि में दो मिनट का मौन

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 1975 में इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल की कड़ी निंदा करते हुए इसे “लोकतंत्र की हत्या” बताया गया। साथ ही आपातकाल के दौरान मारे गए नागरिकों की याद में दो मिनट का मौन भी रखा गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “‘The Emergency Diaries’ मेरे आपातकाल के वर्षों की यात्रा का दस्तावेज है। इसने उस दौर की बहुत सी यादें ताज़ा कर दीं। मैं उन सभी से आग्रह करता हूं जिन्होंने आपातकाल के उन काले दिनों को देखा या जिनके परिवार प्रभावित हुए, वे अपने अनुभव सोशल मीडिया पर साझा करें। इससे युवाओं को उस शर्मनाक दौर के बारे में जागरूकता मिलेगी।”

दिल्ली के मंत्री परवेश वर्मा ने ANI से कहा, “मंत्रिपरिषद की बैठक में आपातकाल की निंदा का प्रस्ताव पारित किया गया। साथ ही उस समय MISA (Maintenance of Internal Security Act) के तहत बंद किए गए लोगों को NDMC द्वारा सम्मानित किया जाएगा।” “यह देश का काला अध्याय था, जब संविधान को कुचला गया। यह विडंबना है कि वही पार्टी जो तब लोगों को जेल भेजती थी, आज संविधान की दुहाई देती है। यह शर्मनाक है।”

भारत में आपातकाल 25 जून 1975 को घोषित किया गया था, जो 21 मार्च 1977 तक चला — कुल 21 महीने।
इसे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आकाशवाणी के माध्यम से राष्ट्र को संबोधित करते हुए लागू किया था। इस घोषणा से कुछ ही घंटे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने आंशिक रूप से स्थगित किया था, जिसमें इंदिरा गांधी के लोकसभा चुनाव को अवैध ठहराया गया था।

आपातकाल के दौरान देश में मौलिक अधिकार निलंबित, मीडिया पर सेंसरशिप, और विपक्ष के नेताओं की गिरफ्तारियां आम बात हो गई थी। लाखों लोगों को बिना मुकदमे जेलों में डाला गया। इस वर्ष आपातकाल की 50वीं बरसी पर केंद्र सरकार ने इसे याद करते हुए एक बार फिर लोकतंत्र की रक्षा और संविधान की मर्यादा बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

इस कदम को भाजपा द्वारा कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला माना जा रहा है, वहीं इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को भारत के सबसे काले राजनीतिक अध्याय के प्रति जागरूक करना भी है।

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