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सरकार ने पहल-आधार से एलपीजी सब्सिडी ट्रांसफर मजबूत किया: पुरी!

इस सिस्टम के तहत, उपभोक्ताओं को रिफिल बुकिंग, कैश मेमो जनरेशन और रिफिल डिलीवरी जैसे प्रमुख चरणों पर एसएमएस के जरिए सूचनाएं प्राप्त होती हैं| 

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केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में कहा कि सरकार घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी वितरण और सब्सिडी हस्तांतरण को कुशल, पारदर्शी और समावेशी बनाने के लिए निरंतर कदम उठा रही है।
उन्होंने बताया कि पहल (डीबीटीएल) स्कीम, आधार-आधारित सत्यापन, बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन और अयोग्य या नकली कनेक्शनों को हटाने जैसी पहलों से लक्षित सब्सिडी ट्रांसफर सिस्टम काफी मजबूत हुआ।

केंद्रीय मंत्री पुरी ने बताया कि देश भर के सभी एलपीजी वितरकों में आईवीआरएस/एसएमएस रिफिल बुकिंग सिस्टम लागू किया गया है। इस सिस्टम के तहत, उपभोक्ताओं को रिफिल बुकिंग, कैश मेमो जनरेशन और रिफिल डिलीवरी जैसे प्रमुख चरणों पर एसएमएस के जरिए सूचनाएं प्राप्त होती हैं, जिससे वे अपने लेन-देन को ट्रैक कर सकते हैं और गलत या न मिलने की स्थिति में रिपोर्ट कर सकते हैं।

उन्होंने आगे बताया कि तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) शुरू किया है, जो कैश मेमो जनरेशन के समय उपभोक्ता को एसएमएस के माध्यम से भेजा जाता है और डिलीवरी के समय डिलीवरी कर्मियों के साथ साझा करना आवश्यक होता है, जिससे प्रमाणीकरण सुनिश्चित होता है।

अनुपालन सुनिश्चित करने को लेकर केंद्रीय मंत्री ने बताया कि तेल विपणन कंपनियों के क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा एलपीजी वितरकों का नियमित निरीक्षण किया जाता है। इसके अलावा, क्षेत्रीय, जोनल, डिविजनल कार्यालयों और प्रादेशिक कार्यालयों के अधिकारी, एंटी-एडल्टरेशन सेल, क्वालिटी रिएश्योरेंस सेल और विजिलेंस डिपार्टमेंट के साथ मिलकर वितरकों के गोदामों, शोरूमों, वितरण स्थलों की जांच करते हैं, ताकि एलपीजी का दुरुपयोग रोका जा सके।

केंद्रीय मंत्री पुरी ने बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण अभियान को लेकर कहा कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजनाओं के लिए आधार-आधारित प्रमाणीकरण, लाभार्थियों की सटीक, वास्तविक समय पर और लागत प्रभावी पहचान, प्रमाणीकरण और दोहराव को कम करने में सक्षम बनाता है।

1 जुलाई तक मौजूदा पीएमयूवाई लाभार्थियों में से 67 प्रतिशत का बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण पूरा हो चुका है। इसके अलावा, सभी नए पीएमयूवाई उपभोक्ताओं को कनेक्शन जारी होने से पहले बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से गुजरना होगा।

डुप्लीकेशन हटाने की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप, 8.49 लाख प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) कनेक्शन समाप्त कर दिए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि जनवरी 2025 में, उन पीएमयूवाई उपभोक्ताओं को हटाने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया जारी की गई थी, जिन्होंने कनेक्शन लगने के बाद कोई रिफिल नहीं लिया था। इस एसओपी के तहत, लगभग 12,000 निष्क्रिय पीएमयूवाई कनेक्शन समाप्त कर दिए गए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि 2024-25 के दौरान, लगभग 194 करोड़ एलपीजी रिफिल उपभोक्ताओं को वितरित किए गए और इनमें से केवल 0.08 प्रतिशत के लिए शिकायतें प्राप्त हुईं, जो कि ज्यादातर सब्सिडी हस्तांतरण या वितरण में देरी से संबंधित थी।

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