अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि आज मेरा मन ऐसे भावों से भरा है, जिन्हें शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है। इस पवित्र स्थल पर बिताया गया हर पल, संतों का सानिध्य और जनसमूह का आशीर्वाद उनके लिए जीवनभर यादगार रहेगा। उन्होंने इसे अपना सौभाग्य बताया कि उन्हें इस पावन अवसर पर यहां आने का मौका मिला और सभी को शुभकामनाएं दीं।
प्रधानमंत्री ने भारत की सांस्कृतिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि भारत हजारों वर्षों से एक जीवंत सभ्यता रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया में बहुत कम ऐसे उदाहरण मिलते हैं, जहां परंपराएं इतनी लंबे समय तक लगातार बनी रही हों। श्री आदिचुंचनगिरी मठ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह मठ करीब 2.000 वर्षों की परंपरा और आध्यात्मिक विरासत का जीवंत प्रमाण है। इसकी गुरु परंपरा, आध्यात्मिक दर्शन और सेवा की भावना ने पीढ़ियों तक इस भूमि को समृद्ध किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारे समाज में समय-समय पर ऐसे महान संत और महापुरुष आते रहे हैं, जो केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन तक सीमित नहीं रहते बल्कि समाज के दुख-दर्द को समझते हैं और लोगों को कठिनाइयों से बाहर निकालने का मार्ग दिखाते हैं।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत करोड़ों गरीबों को मुफ्त इलाज मिल चुका है। उन्होंने बताया कि इस योजना का दायरा बढ़ाकर 70 साल से अधिक उम्र के सभी वरिष्ठ नागरिकों को भी इसमें शामिल किया गया है, ताकि उन्हें सम्मान के साथ बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
प्रधानमंत्री ने आदिचुंचनगिरी मठ के महास्वामीजी के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि महास्वामीजी ने शिक्षा के क्षेत्र में कई संस्थानों की स्थापना की, जहां प्राथमिक स्तर से लेकर मेडिकल और इंजीनियरिंग तक की पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इससे खासकर ग्रामीण और गरीब परिवारों के बच्चों को बहुत लाभ मिला है। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी उन्होंने सेवा भाव से प्रेरित संस्थानों की स्थापना की, जिससे गुणवत्तापूर्ण इलाज हर नागरिक तक पहुंच सके।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने लोगों के सामने नौ अहम आग्रह रखे। उन्होंने पानी बचाने और उसके बेहतर प्रबंधन का संकल्प लेने की अपील की। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत अपनी मां के सम्मान में पेड़ लगाने और पर्यावरण की रक्षा का संदेश दिया। स्वच्छता को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए हर जगह साफ-सफाई बनाए रखने का जिक्र किया।
प्रधानमंत्री ने ‘वोकल फॉर लोकल’ को अपनाने, देश को जानने और घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने और मिलेट्स को भोजन में शामिल करने की सलाह दी। साथ ही मोटापे से बचने के लिए खाने में तेल की मात्रा 10 प्रतिशत कम करने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि योग और खेल को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए और जरूरतमंदों की सेवा को समाज की मजबूती का आधार बताया। अंत में पीएम मोदी ने कहा कि अगर इन नौ आग्रहों पर ईमानदारी से अमल किया जाए, तो विकसित कर्नाटक और विकसित भारत का सपना जल्द पूरा हो सकता है।
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