अमेरिकी सलाहकार पीटर नवारो के बयानों पर भारत का कड़ा जवाब

कहा– “भ्रामक और गलत”

अमेरिकी सलाहकार पीटर नवारो के बयानों पर भारत का कड़ा जवाब

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भारत ने अमेरिकी व्हाइट हाउस ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो के विवादित बयानों को सख्ती से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने शुक्रवार (5 सितंबर)को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि नवारो के बयान गलत और भ्रामक हैं और भारत इन्हें पूरी तरह से खारिज करता है। जयसवाल ने स्पष्ट कहा, “हमने पीटर नवारो द्वारा दिए गए गलत और भ्रामक बयानों को देखा है और जाहिर है कि हम इन्हें अस्वीकार करते हैं।” गौरतलब है कि नवारो ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय आयात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का बचाव करते हुए आरोप लगाया था कि “ब्राह्मण भारतीय जनता की कीमत पर मुनाफाखोरी कर रहे हैं।”

भारत ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत-अमेरिका संबंध बेहद अहम और व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर आधारित हैं। जयसवाल ने कहा, “यह संबंध हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों देश साझा हितों, लोकतांत्रिक मूल्यों और गहरे लोगों के बीच रिश्तों पर आधारित वैश्विक रणनीतिक साझेदारी साझा करते हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि यह साझेदारी कई चुनौतियों और बदलावों के बावजूद मजबूती से कायम है और दोनों देश एक ठोस द्विपक्षीय एजेंडे को आगे बढ़ाने पर केंद्रित हैं।

जयसवाल ने हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच अलास्का में संयुक्त सैन्य अभ्यास और 2+2 इंटर-सेशनल मीटिंग हुई है। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका के साथ अपने रिश्तों को आपसी सम्मान और साझा हितों के आधार पर और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

दूसरी ओर, नवारो लगातार भारत की रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर आलोचना करते रहे हैं। उनका आरोप है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर उसे यूरोप, अफ्रीका और एशिया के बाजारों में महंगे दाम पर बेच रहा है, जिससे यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने हाल ही में रूस-यूक्रेन संघर्ष को विवादित ढंग से “मोदी का युद्ध” तक कह डाला।

नवारो ने फ़ॉक्स न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले भारत का रूसी तेल से कोई खास संबंध नहीं था। उनके अनुसार, “पुतिन ने पीएम मोदी को डिस्काउंट पर क्रूड दिया, भारत ने उसे रिफाइन कर यूरोप, अफ्रीका और एशिया में बेचा और भारी मुनाफा कमाया। भारत अब क्रेमलिन के लिए ‘लॉन्ड्रोमैट’ बन गया है।” उन्होंने यहां तक दावा किया था कि भारत की मास्को और बीजिंग से नजदीकी बढ़ रही है और कहा, “भारतीय जनता को समझना चाहिए कि ब्राह्मण उनकी कीमत पर मुनाफा कमा रहे हैं। इसे बंद होना चाहिए।”

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