कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मर्क्सिस्ट) के नेता ओर केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने ईरान पर इज़रायल द्वारा किए गए ताज़ा हवाई हमलों को लेकर अस्वस्थता से भरी प्रतिक्रिया दी है। शुक्रवार (13 जून) को मीडिया से बातचीत में विजयन ने इज़रायल को एक ‘लंबे समय से उपद्रवी देश’ करार दिया और कहा कि यह हमला घिनौना और अस्वीकार्य है।
सीएम विजयन ने कहा, “इज़रायल को लंबे समय से एक उपद्रवी देश के रूप में जाना जाता है। यह सच है और सभी को पता है। उन्हें लगता है कि अमेरिका के समर्थन से वे कुछ भी कर सकते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “हमने जो सुना है, वह वाकई घिनौना है। ईरान पर हमला स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह विश्व शांति के लिए खतरा है और सभी को इस मनमानी कार्रवाई का विरोध करना चाहिए।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब केरल में नीलांबुर विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव का प्रचार चरम पर है। इस सीट पर 19 जून को मतदान होना है। गौरतलब है कि इस क्षेत्र में मुस्लिम आबादी क़रीब 43 प्रतिशत है और हिंदू बहुल इलाकों से सटा हुआ है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बयान का मकसद मुस्लिम वोटबैंक को साधना हो सकता है, जो आमतौर पर फिलिस्तीन समर्थक रुख रखते हैं।
वामपंथी नेतृत्व, खासकर मुख्यमंत्री विजयन, पहले भी लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान हमास पर इज़रायली कार्रवाई को लेकर मुखर विरोध दर्ज करा चुके हैं। मुख्यमंत्री विजयन ने आरोप लगाया कि इज़रायल अमेरिका के समर्थन के दम पर इस तरह की मनमानी कार्रवाई कर रहा है। हालांकि, अमेरिका ने हमले से खुद को अलग बताते हुए स्पष्ट किया कि वह इसमें शामिल नहीं है।
अमेरिकी विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मार्को रुबियो ने एक बयान में कहा, “हम ईरान के खिलाफ हमलों में शामिल नहीं हैं। हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता क्षेत्र में अमेरिकी सेना की रक्षा करना है। इज़रायल ने हमें सलाह दी है कि उनका मानना है कि यह कार्रवाई उनकी आत्मरक्षा के लिए जरूरी थी।”
इज़रायल ने शुक्रवार (13 जून) तड़के ईरान में कई ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए। माना जा रहा है कि ये हमले ईरान के परमाणु कार्यक्रम और इज़रायली राष्ट्रीय सुरक्षा पर मंडरा रहे खतरे की आशंका के चलते किए गए हैं। इस कदम से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है और यह आशंका तेज़ हो गई है कि कहीं यह टकराव किसी व्यापक युद्ध में न बदल जाए।
यह बयान इसलिए भी अहम हो जाता है क्योंकि केरल की हजारों नर्सें और मेडिकल पेशेवर इज़रायल में कार्यरत हैं। ऐसे में इज़रायल-विरोधी रुख के राजनीतिक और सामाजिक असर पर चर्चा होना स्वाभाविक है। राजनीतिक विश्लेषक यह देख रहे हैं कि मुख्यमंत्री का यह बयान सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय घटना पर प्रतिक्रिया है या नीलांबुर उपचुनाव की रणनीति का हिस्सा।
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