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Saturday, April 18, 2026
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“मुझे खुद भरोसा नहीं, मैं कैसे जिंदा निकला” विमान हादसे में बच­ने वाले विश्वास कुमार की दास्तान

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अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया फ्लाइट AI‑171 के भीषण हादसे ने देश‑दुनिया को स्तब्ध कर दिया है। गुरुवार दोपहर 1:38 बजे उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद बोइंग 787‑8 ड्रीमलाइनर सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से महज़ कुछ किलो­मीटर दूर एक मेडिकल हॉस्टल की इमारत से टकरा गया और आग का गोला बन गया। 230 यात्रियों व 12 क्रू सदस्‍यों—कुल 242 लोगों में से 241 की मौत हो चुकी है; मात्र विश्वास कुमार रमेश ही जीवित बचे हैं, जिन्हें लोग अब ‘मिरेकल मैन’ कह रहे हैं।

अस्पताल के बर्न‑वार्ड में जीवन के लिए जूझते विश्वास ने मीडिया को जो बताया, वह रोंगटे खड़े कर देता है। उनके शब्दों में, “मुझे खुद भरोसा नहीं होता कि मैं कैसे बाहर जिंदा निकला। क्योंकि कुछ टाइम के लिए मुझे भी लगा कि मैं मरने वाला हूं। जब मेरी आंख खुली तब एहसास हुआ मैं जिंदा हूं। मैंने दुर्घटना के बाद प्लेन से बाहर निकलने का रास्ता ढूंढा।”

टेक‑ऑफ़ के ठीक एक मिनट बाद इंजन की अजीब‑सी कांपते हुए रुक जाने की आवाज़ ने यात्रियों में खलबली मचा दी। विश्वास बताते हैं कि तभी केबिन लाइटें चमक उठीं, और कुछ सेकेंड बाद विमान हॉस्टल‑इमारत से जा टकराया। आग, धुआँ और भगदड़ के बीच उनका सेक्शन दीवार से चिपका नहीं था—खिड़की‑किनारे का दरवाज़ा टूट चुका था; उसी “टूटे गेट” से वे किसी तरह रेंगते हुए बाहर निकल पाए। उनका बायाँ हाथ बुरी तरह झुलस गया, पर एम्बुलेंस समय से पहुँच गई।

सरकारी पुष्टि के अनुसार मृतकों में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी सहित 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, 7 पुर्तगाली और 1 कनाडाई नागरिक शामिल हैं। दोहरे‑इंजन विफलता की प्रारम्भिक आशंका के चलते विमान मात्र 600 फ़ीट की ऊँचाई से नियंत्रण खो बैठा। जाँच दल ब्लैक‑बॉक्स के विश्लेषण और रख‑रखाव अभिलेख खंगालने में जुटा है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह जीवित गवाही?

विश्वास कुमार रमेश की गवाही केवल एक दुर्घटना के चश्मदीद का बयान नहीं है, बल्कि यह तकनीकी, प्रशासनिक और मानवीय मोर्चों पर बेहद अहम सवाल खड़े करती है। उनके अनुसार, टेकऑफ के महज एक मिनट के भीतर ही इंजन की गति रुकने जैसी आशंका हुई, जिससे यह संकेत मिलता है कि विमान के पावर सिस्टम में गंभीर गड़बड़ी रही होगी, और संभवतः इसका फेल-सेफ सिस्टम समय पर सक्रिय नहीं हुआ। यह संभावित तकनीकी चूक भविष्य के विमानों के सुरक्षा मानकों की पुनः जांच की माँग करती है। इसके अलावा, जिस मेडिकल हॉस्टल की इमारत से विमान टकराया, वह एयरपोर्ट से बेहद करीब था—यह स्पष्ट करता है कि एयरपोर्ट के आसपास के इलाकों के संरचनात्मक नक्शों और निर्माण मानदंडों की समीक्षा ज़रूरी है। क्या इन रिहायशी या संस्थागत इमारतों की ऊंचाई, स्थान और घनत्व पर किसी ने गंभीरता से ध्यान दिया था? यदि नहीं, तो यह एक बड़ी चूक है।

डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ़ सिविल एविएशन (DGCA) और एयर इंडिया की संयुक्त टीम जाँच‑रिपोर्ट 30 दिन में प्रस्तुत करेगी। प्रधानमंत्री और नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने मृतकों के परिजनों को शीघ्र मुआवज़ा एवं फास्ट‑ट्रैक बीमा सहायता का आश्वासन दिया है।

वहीं अस्पताल के बिस्तर पर विश्वास लगातार वही सवाल दोहराते हैं—“क्या मैं वाक़ई बच गया हूँ?” उनके लिए यह ‘द्वितीय जन्म’ है, और सैकड़ों शोकाकुल परिवारों के लिए एक चमत्कार भरी उम्मीद कि सत्य सामने आए, दोष तय हों और भविष्य में कोई उड़ान यूँ ध्वस्त न हो।

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