तमिलनाडु की राजनीति में जोसफ विजय और उनकी पार्टी TVK को लेकर जारी सत्ता गठजोड़ ने शुक्रवार(8 मई) देर रात नया मोड़ ले लिया। ऐसा माना जा रहा था कि TVK ने आखिरकार 118 विधायकों का जादुई आंकड़ा हासिल कर लिया है और सरकार गठन का रास्ता साफ हो गया है। लेकिन राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने विजय को एक बार फिर बहुमत साबित करने के लिए वापस भेज दिया।
सूत्रों के मुताबिक विजय ने शुक्रवार को राज्यपाल को 117 विधायकों के समर्थन पत्र सौंपे। इनमें TVK के 107 विधायक शामिल थे। हालांकि पार्टी ने चुनाव में 108 सीटें जीती थीं, लेकिन विजय खुद दो सीटों से विजयी हुए हैं और माना जा रहा है कि उन्हें एक सीट छोड़नी पड़ेगी, जिससे पार्टी की प्रभावी संख्या 107 रह जाएगी।
इसके अलावा विजय ने पांच कांग्रेस विधायकों, चार वामपंथी विधायकों और एक AMMK विधायक का समर्थन पत्र भी राज्यपाल को सौंपा। इसी आधार पर TVK ने शनिवार सुबह 11 बजे शपथ ग्रहण की तैयारी शुरू कर दी थी। लेकिन कुछ ही देर बाद राजनीतिक घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया।
AMMK महासचिव TTV Dhinakaran ने राज्यपाल को फोन कर दावा किया कि विजय के समर्थन में जमा किया गया AMMK विधायक का हस्ताक्षर फर्जी है। इसके बाद स्थिति और जटिल हो गई। बताया गया कि TVK ने संबंधित विधायक कामराज से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
कुछ समय बाद AMMK विधायक कामराज चेन्नई में सामने आए और दिनाकरन के साथ राज्यपाल से मुलाकात की। दोनों ने आरोप लगाया कि TVK द्वारा हॉर्स ट्रेडिंग की कोशिश की जा रही है। कामराज ने कथित तौर पर कहा कि समर्थन पत्र पर किया गया हस्ताक्षर उनका नहीं है। दिनाकरन ने यह भी स्पष्ट किया कि AMMK राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ मजबूती से खड़ी है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद विजय के समर्थन में विधायकों की संख्या घटकर 116 बताई जाने लगी, जो बहुमत के लिए जरूरी 118 के आंकड़े से दो कम है। हालांकि TVK ने बाद में एक वीडियो जारी किया, जिसमें कथित तौर पर विधायक कामराज विजय को समर्थन देने वाला पत्र लिखते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके बावजूद स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।
इस बीच VCK ने भी राजनीतिक सस्पेंस बढ़ा दिया। राज्यपाल भवन के सूत्रों के अनुसार DMK गठबंधन की सहयोगी पार्टी VCK ने राज्यपाल को कोई आधिकारिक समर्थन पत्र नहीं सौंपा। ईमेल के जरिए समर्थन भेजे जाने की खबरों को भी राज्यपाल कार्यालय ने खारिज कर दिया।
शुक्रवार को VCK ने विजय पर निशाना साधते हुए उन्हें “घमंडी” बताया था। पार्टी का आरोप था कि विजय ने व्यक्तिगत रूप से संपर्क करने के बजाय केवल व्हाट्सऐप संदेशों के जरिए समर्थन मांगा। रात में एक और झटका तब लगा जब IUML, जिसके दो विधायक ने भी विजय को समर्थन देने से इनकार कर दिया। पार्टी ने साफ कहा कि वह DMK गठबंधन के साथ बनी हुई है।
इन घटनाओं के बाद फिलहाल विजय के शपथ ग्रहण पर रोक लग गई है। सूत्रों के अनुसार राज्यपाल ने विजय से कहा है कि जब तक वे 118 विधायकों के स्पष्ट हस्ताक्षर नहीं लाते, तब तक उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया जाएगा। तमिलनाडु की राजनीति में जारी यह सत्ता गठजोड़ हर घंटे नया मोड़ लेता दिखाई दे रहा है और अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि विजय बहुमत का आंकड़ा जुटा पाते हैं या नहीं।
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