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Wednesday, September 30, 2026
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रूसी तेल खरीद पर भारत को सजा देने से पहले सोचें!

JPMorgan CEO की US को चेतावनी

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US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर नए बैन लगाने वाले कानून पर साइन किए हैं। इस कानून के मुताबिक, US एडमिनिस्ट्रेशन के पास रूस से तेल और नैचुरल गैस खरीदने वाले बड़े देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार है। इसका असर भारत और चीन पर भी पड़ सकता है। इस बीच, JPMorgan के CEO जेमी डिमन ने US को चेतावनी दी है कि वह भारत पर टैरिफ लगाने से पहले सोचे।

JPMorgan के CEO जेमी डिमन ने US से कहा है कि रूसी तेल खरीद पर 100% टैरिफ लगाने से पहले, भारत की तेल रिफाइनरियों और सप्लाई चेन पर पड़ने वाले असर को समझना ज़रूरी है। बिना सोचे-समझे बैन लगाने से भारत के साथ-साथ ग्लोबल तेल मार्केट, कीमतों और भारत-US के आर्थिक रिश्तों पर भी असर पड़ सकता है।

JPMorgan इंडिया इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, डिमन ने कहा कि US को पहले यह समझना चाहिए कि भारतीय रिफाइनरियां रूसी कच्चे तेल का इस्तेमाल कैसे करती हैं। उन्होंने आगे कहा कि ऐसा कोई भी फैसला लेने से पहले भारत और ग्लोबल तेल मार्केट पर पड़ने वाले असर को समझना ज़रूरी है।

जेमी डिमन ने रूसी तेल पर टैरिफ लगाने के तरीके पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनका मानना ​​है कि तेल पर कोई टैरिफ नहीं लगाया जाना चाहिए। उनकी राय में, रूस पर दबाव डालने के लिए उठाए जा रहे कदमों के मद्देनजर, US को इस पर विचार करना चाहिए कि क्या इससे भारत और ग्लोबल तेल बाज़ार को नुकसान हो रहा है, उन्होंने यह भी सवाल उठाया।

डिमन ने कहा कि अगर भारत रूसी तेल नहीं खरीदता है, तो उसे कहीं और से तेल खरीदना होगा। हालांकि, सभी क्रूड ऑयल एक जैसे नहीं होते। अलग-अलग रिफाइनरियों को एक खास तरह के क्रूड ऑयल को प्रोसेस करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसलिए, रूसी तेल को दूसरे देश के क्रूड ऑयल से बदलना हर रिफाइनरी के लिए ज़रूरी नहीं है।

भारत दुनिया के सबसे बड़े क्रूड ऑयल इंपोर्टर्स में से एक है और रूसी तेल इसकी सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा है। डिमन के अनुसार, रूसी सप्लाई में कोई भी रुकावट सिर्फ़ भारत तक ही सीमित नहीं होगी। इससे इंटरनेशनल तेल बाज़ार में सप्लाई पर असर पड़ सकता है और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

डिमन ने कहा कि US को यूक्रेन की मदद के लिए और कदम उठाने चाहिए, लेकिन रूस के एनर्जी बिज़नेस के खिलाफ़ कार्रवाई करने के बड़े असर पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर अमेरिका और भारत के बीच बातचीत की जरूरत है।

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