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Wednesday, July 1, 2026
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के. वेंकट नारायण की नियुक्ति एक नीतिगत फैसला, इसमें कुछ गलत नहीं: मंत्री सेंगोट्टैयन!

उन्होंने कहा, “सरकारी प्रतिनिधियों की नियुक्ति एक नीतिगत निर्णय है। भारत में हर व्यक्ति को इसके लिए समान अधिकार है। इसलिए इस नियुक्ति में कुछ भी गलत नहीं है।”

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तमिलनाडु के राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री के.ए. सेंगोट्टैयन ने रविवार को राज्य सरकार के उस फैसले का बचाव किया, जिसमें मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ के निर्माता के. वेंकट नारायण को दिल्ली में तमिलनाडु सरकार का विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है। मंत्री ने कहा कि सरकार का यह निर्णय उचित है और इसमें किसी तरह की आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “सरकारी प्रतिनिधियों की नियुक्ति एक नीतिगत निर्णय है। भारत में हर व्यक्ति को इसके लिए समान अधिकार है। इसलिए इस नियुक्ति में कुछ भी गलत नहीं है।”

मंत्री ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री विजय द्वारा नियुक्त सभी लोग केवल तमिलनाडु के हित में काम करेंगे और केंद्र सरकार के सामने राज्य का प्रभावी रूप से प्रतिनिधित्व करेंगे।

राज्य सरकार ने हाल ही में आदेश जारी कर कर्नाटक मूल के वेंकट नारायण को दिल्ली में तमिलनाडु सरकार का विशेष प्रतिनिधि एक वर्ष के लिए नियुक्त किया है। वेंकट नारायण एक व्यवसायी हैं और मुख्यमंत्री विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ के निर्माता भी हैं। यह फिल्म विजय की राजनीति में पूरी तरह सक्रिय होने से पहले उनकी आखिरी फिल्म मानी जा रही है।

हालांकि, इस नियुक्ति पर विपक्षी दल डीएमके ने कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी के नेताओं ने सवाल उठाया है कि एक ऐसे समय में जब तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कई विवाद चल रहे हैं, तब कर्नाटक के व्यक्ति को यह जिम्मेदारी क्यों दी गई।

डीएमके सांसद तिरुची शिवा ने इसे “आश्चर्यजनक और चौंकाने वाला” बताया और सवाल किया कि क्या यह प्रतिनिधि कावेरी नदी और मेकेदातु बांध जैसे मुद्दों पर तमिलनाडु के हितों की मजबूती से रक्षा कर पाएगा।

डीएमके के वरिष्ठ नेता ए. राजा ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि प्रभावशाली लोगों को महत्वपूर्ण पद दिए जा रहे हैं, जबकि अनुभवी नेताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि “परिवर्तन” की बात करने वाली सरकार अब अपने ही वादों से भटकती नजर आ रही है।

यह नियुक्ति अब तमिलनाडु की राजनीति में नया विवाद बन गई है, जहां विपक्ष सरकार से इस फैसले पर स्पष्टता मांग रहा है, जबकि सरकार इसे पूरी तरह वैध और राज्य के हित में बता रही है।

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