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Wednesday, June 3, 2026
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पुणे में सत्ताधारी पार्टी के बीच बड़ा घमासान, महागठबंधन में बड़ी दरार !

अजित पवार पुणे के संरक्षक मंत्री पद के लिए जोर लगा रहे थे| पुणे के संरक्षक मंत्री पद को लेकर पर्दे के पीछे काफी बवाल मचा हुआ है| इसके बाद आखिरकार अजित पवार को पुणे के संरक्षक मंत्री का पद दिया गया, जबकि चंद्रकांत पाटिल को सोलापुर और अमरावती के संरक्षक मंत्री की जिम्मेदारी दी गई|

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उपमुख्यमंत्री अजित पवार की राष्ट्रवादी पार्टी का मजबूत गुट सत्ता में आने के बाद सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट के बीच दरार की चर्चा तभी शुरू हो गई थी। खास तौर पर चर्चा थी कि पुणे के पालक मंत्री पद को लेकर भाजपा में काफी असमंजस की स्थिति है| क्योंकि उस वक्त भाजपा मंत्री चंद्रकांत पाटिल पुणे के संरक्षक मंत्री थे| अजित पवार पुणे के संरक्षक मंत्री पद के लिए जोर लगा रहे थे| पुणे के संरक्षक मंत्री पद को लेकर पर्दे के पीछे काफी बवाल मचा हुआ है| इसके बाद आखिरकार अजित पवार को पुणे के संरक्षक मंत्री का पद दिया गया, जबकि चंद्रकांत पाटिल को सोलापुर और अमरावती के संरक्षक मंत्री की जिम्मेदारी दी गई|

हालांकि चंद्रकांत पाटिल को पुणे की जगह दो जिलों की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन ऐसा लग रहा है कि पुणे में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है| क्योंकि पुणे की जिला योजना समिति में शिंदे गुट और भाजपा के सदस्यों ने अजित पवार गुट के खिलाफ आक्रामक रुख अपना लिया है| तो आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक ‘महाभारत’ होने के संकेत मिल रहे हैं|

क्या है असल मामला?: अजित पवार के खिलाफ भाजपा की जिला योजना समिति और शिंदे गुट के सदस्यों ने ही आपत्ति जताई है। अजित पवार के पुणे का संरक्षक मंत्री बनने के बाद बीजेपी और शिंदे गुट के पदाधिकारियों द्वारा सुझाए गए कार्यों की सूची में भारी कटौती की गई है, साथ ही भाजपा की जिला योजना समिति के सदस्यों ने आरोप लगाया है कि अजित पवार अपने गुट के लोगों का पक्ष ले रहे हैं| बिना जिला योजना समिति की बैठक के 800 करोड़ के काम स्वीकृत कर दिए गए। सदस्यों ने कलेक्टर राजेश देशमुख को बयान दिया है कि उन कार्यों को निरस्त करें।

इसमें आरोप लगाया गया है कि भाजपा और शिंदे ग्रुप को नाममात्र का फंड उपलब्ध कराया गया है| इसके विरोध में भाजपा जिला योजना समिति के सदस्य शरद बुट्टे पाटिल और जीवन अप्पा कोंडे के नेतृत्व में पुणे जिला अधिकारी कार्यालय, संभागीय आयुक्त, जिला योजना अधिकारी और जिला परिषद सीओ के पास शिकायत दर्ज कराई गई है।

‘नहीं तो जाएंगे कोर्ट’, बड़ी चेतावनी: 800 करोड़ के काम रद्द करें, नहीं तो जाएंगे कोर्ट इस बार सीधी चेतावनी दी गई है| इससे जिला योजना समिति, बीजेपी, एकनाथ शिंदे गुट बनाम अजित पवार गुट में नई बहस शुरू हो गई है| अजित पवार गुट के सत्ता में आने से जहां बीजेपी-शिंदे गुट का काम चौपट हो गया है, वहीं महागठबंधन के कार्यकर्ताओं में भी दरार की तस्वीर दिख रही है|
चंद्रकांत पाटिल ने बैठक में कार्यों को दी मंजूरी: करीब सात महीने बाद सत्यापन के लिए जिला परिषद को भेजी गई जिला योजना समिति के कार्यों की अनुमोदित सूची में बड़े बदलाव की चर्चा है| बैठक में पुणे के तत्कालीन संरक्षक मंत्री चंद्रकांत पाटिल द्वारा अनुमोदित कार्यों का परीक्षण किया गया है। आरोप है कि अजित पवार गुट के विधायकों और कार्यकर्ताओं द्वारा सुझाए गए करोड़ों रुपये के कार्यों का अनियमित भुगतान किया गया है|इसलिए पुणे जिले में जिला योजना समिति के कामकाज को लेकर भाजपा, शिंदे गुट और अजित पवार गुट के बीच टकराव के संकेत मिल रहे हैं|
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