ईरान और इजरायल के बीच चल रहे तनाव ने अब वैश्विक स्तर पर गंभीर मोड़ ले लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के तीन प्रमुख परमाणु स्थलों — फोर्डो, नतांज और एस्फाहान — पर किए गए हवाई हमलों के बाद दुनिया भर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। भारत में भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने इस हमले की तीखी आलोचना करते हुए मुस्लिम देशों के संगठन OIC और पाकिस्तान पर भी सवाल उठाए हैं।
महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “जैसी उम्मीद थी, ईरान पर हमले के बाद OIC की प्रतिक्रिया सिर्फ दिखावे तक सीमित रही।” उन्होंने पाकिस्तान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जिसने हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए सिफारिश करने में जल्दबाजी की, अब वही देश इस हमले के बाद शर्मसार महसूस कर रहा है।
The OIC as expected has once again limited its response to mere lip service in the wake of the attack on Iran. Meanwhile the country that rushed to recommend Donald Trump for a Nobel Peace Prize now finds itself with egg on its face after he attacked Iran. By launching this…
— Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) June 22, 2025
दरअसल, महबूबा का यह बयान पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और ट्रंप के बीच व्हाइट हाउस में हुई हालिया मुलाकात के संदर्भ में आया है, जिसमें मुनीर ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए सिफारिश की थी। अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद यह सिफारिश विवादों में घिरती नजर आ रही है।
महबूबा मुफ्ती ने आगे लिखा, “ट्रंप ने ईरान पर हमला करके तनाव को और अधिक खतरनाक बना दिया है। यह कदम पूरे क्षेत्र को हिंसा की नई लहर और दुनिया को वैश्विक संघर्ष के मुहाने पर ला खड़ा करता है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत, जिसे ऐतिहासिक रूप से वैश्विक मामलों में संतुलनकारी भूमिका निभाने वाला देश माना जाता है, इस मुद्दे पर न केवल खामोश है बल्कि हमलावर पक्ष के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है।
ईरान पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद जिस प्रकार क्षेत्रीय राजनीति और कूटनीति में उलझाव पैदा हुआ है, उसमें भारत सहित सभी प्रमुख देशों की भूमिका पर निगाहें टिकी हुई हैं। महबूबा मुफ्ती के इस बयान से साफ है कि कश्मीर की सियासत में भी यह मुद्दा अब अपना प्रभाव दिखा रहा है और अंतरराष्ट्रीय घटनाएं घरेलू राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनती जा रही हैं।
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