गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगे कहा कि दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने जालंधर में एफआईआर दर्ज किए जाने के मामले में औपचारिक नोटिस जारी किया है, जो विधानसभा कार्यवाहियों की कथित छेड़छाड़ वाले वीडियो क्लिप से संबंधित है। नोटिस में कहा गया है कि सदन पहले से ही इस मामले से अवगत है, और वीडियो क्लिप को फॉरेंसिक जांच और विशेषाधिकार समिति के पास भेजा गया है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर और संवैधानिक महत्व का है तथा सीधे सदन की गरिमा, अधिकार और विशेषाधिकारों से जुड़ा है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह मुद्दा किसी एक व्यक्ति या राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है।
गुप्ता ने कहा कि जिस वीडियो के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है, वह किसी व्यक्तिगत रिकॉर्डिंग नहीं, बल्कि सदन की आधिकारिक रिकॉर्डिंग है, जो पूरी तरह से दिल्ली विधानसभा की संपत्ति है। सदन की संपत्ति का इस प्रकार दुरुपयोग करना और इस आधार पर किसी मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि अत्यंत गंभीर और निंदनीय भी है।
विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि सदन की कार्यवाहियों की कोई भी रिकॉर्डिंग केवल सदन की संपत्ति है और किसी राजनीतिक दल, व्यक्ति या बाहरी एजेंसी की नहीं है। उन्होंने यह प्रश्न उठाया कि इस एफआईआर को किस अधिकार और किस आधार पर दर्ज किया गया।
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि पूरे प्रकरण में जालंधर के पुलिस कमिश्नर की भूमिका अत्यंत चिंताजनक है और यह प्रथम दृष्टया सदन के विशेषाधिकारों का उल्लंघन प्रतीत होता है। इसलिए उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का स्पष्ट मामला बनता है, जिसे सदन गंभीरता से देखेगा।
विधानसभा अध्यक्ष ने आगे कहा कि विपक्ष की मांग पर और पूरी पारदर्शिता एवं निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए वीडियो क्लिप को फॉरेंसिक साइंस लैब भेजा गया। हालांकि, सदन की आधिकारिक रिकॉर्डिंग को “छेड़छाड़ की गई” बताना स्वयं में सदन की गरिमा पर हमला है।
गुप्ता ने यह भी कहा कि बार-बार बुलाने के बावजूद विपक्ष की नेता सदन में उपस्थित नहीं हुईं और प्रदूषण पर चर्चा में भाग नहीं लिया। जब चर्चा चल रही थी, विपक्ष के सदस्य सदन से उठकर चले गए। आतिशी से केवल संक्षिप्त माफी मांगने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने माफी नहीं मांगी; अन्यथा यह मामला वहीं समाप्त हो जाता।
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