प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल के तिरुवनंतपुरम में विझिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह के उद्घाटन समारोह में कांग्रेस सांसद शशि थरूर को लेकर जो टिप्पणी की, उसने राजनीतिक हलकों में फिर से एक चर्चा को जन्म दे दिया है—क्या थरूर कांग्रेस छोड़ बीजेपी का रुख करेंगे? मंच पर थरूर की मौजूदगी और पीएम का गर्मजोशी से केवल उनसे हाथ मिलाना, इसके बाद आया उनका चुटीला बयान… इन सबने कांग्रेस के भीतर बेचैनी बढ़ा दी है।
मोदी ने केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की ओर इशारा करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री जी, आप INDI गठबंधन के मजबूत स्तंभ हैं। शशि थरूर भी यहीं बैठे हैं। आज का यह कार्यक्रम कई लोगों की नींद उड़ा देगा।” इतना कहकर उन्होंने ठहराव लिया और मज़ाकिया लहजे में कहा कि “अनुवादक इसे शायद नहीं अनुवाद कर पाएंगे, लेकिन जहां जाना था, बात वहां पहुंच गई है।”
मंच पर मौजूद सभी गणमान्य व्यक्तियों में से पीएम मोदी ने सिर्फ थरूर से ही हाथ मिलाया, जिसे राजनीतिक संकेतों की नजर से पढ़ा जा रहा है। कुछ महीने पहले थरूर ने पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा की तारीफ की थी, और साथ ही एलडीएफ सरकार की आर्थिक नवाचारों की भी सराहना की थी। मार्च में बीजेपी नेता बैजयंत पांडा के साथ उनकी सेल्फी भी वायरल हुई थी, जिससे अटकलें और तेज़ हो गई थीं। हालांकि, थरूर अब तक इन पर चुप्पी साधे हुए हैं।
बंदरगाह का उद्घाटन समारोह सुबह 10.15 बजे शुरू हुआ जब पीएम मोदी हेलीकॉप्टर से पहुंचे। उन्होंने हेलमेट पहनकर ट्रांसशिपमेंट हब का जायजा लिया और सुबह 11.33 बजे प्रथम चरण का औपचारिक शुभारंभ किया। इस मौके पर केरल के राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, अदाणी समूह के अध्यक्ष गौतम अदाणी और सांसद शशि थरूर भी उपस्थित थे।
VIDEO | Kerala: PM Modi addresses a public gathering after inaugurating Vizhinjam International Seaport in Thiruvananthapuram.
"I want to say this to the CM (Pinarayi Vijayan)… you are a strong pillar of INDI alliance. (Congress MP) Shashi Tharoor is also sitting here. Today's… pic.twitter.com/Z18tXGiaqQ
— Press Trust of India (@PTI_News) May 2, 2025
विझिंजम पोर्ट को लेकर खुद थरूर ने पहले कहा था कि “यह एक ऐसा प्रोजेक्ट है जिसे मैं इसकी शुरुआत से समर्थन करता रहा हूं।” ऐसे में उनकी सक्रिय भागीदारी स्वाभाविक मानी जा सकती है। लेकिन मोदी के मंच पर उनके लिए चुने गए शब्दों ने यह संकेत जरूर दिया है कि राजनीतिक परिदृश्य में कुछ खिचड़ी ज़रूर पक रही है।
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या थरूर कांग्रेस के भीतर बगावती सुर अपनाएंगे या बीजेपी की तरफ झुकाव स्पष्ट करेंगे। फिलहाल इतना तय है कि प्रधानमंत्री के एक वाक्य ने विपक्ष के गलियारों में बेचैनी बढ़ा दी है और थरूर एक बार फिर सियासी चर्चाओं के केंद्र में हैं।
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