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Thursday, February 26, 2026
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विशाखापत्तनम में 5 लाख लोगों संग प्रधानमंत्री मोदी ने किया योग

‘हील इन इंडिया’ को बताया नया मंत्र

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आठवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में 5लाख से अधिक लोगों और 40 देशों के राजनयिकों के साथ योग कर एक नया कीर्तिमान रच दिया। इस विशाल आयोजन में मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू भी मंच पर मौजूद रहे। इस बार योग दिवस की थीम रही — ‘एक धरती, एक स्वास्थ्य के लिए योग’, जिसे प्रधानमंत्री ने वैश्विक एकता और पर्यावरणीय संतुलन का प्रतीक बताया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि योग आज न केवल भारत की संस्कृति है, बल्कि यह मानवता के कल्याण का एक वैश्विक अभियान बन चुका है। उन्होंने कहा, “योग जोड़ता है — यह लोगों, संस्कृतियों और देशों को जोड़ने का माध्यम बन गया है। आज की दुनिया में इतनी एकजुटता सामान्य नहीं है।”

प्रधानमंत्री ने मंच से दुनिया की मौजूदा हालातों का ज़िक्र करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया तनाव, युद्ध, अस्थिरता और मानसिक अशांति के दौर से गुजर रही है। ऐसे में योग वह ‘पॉज़ बटन’ है, जिसकी इंसानियत को ज़रूरत है। उन्होंने कहा, “योग हमें रुकने, सोचने और फिर से संतुलन में आने का रास्ता देता है। यह हमें खुद से जोड़ता है, प्रकृति से जोड़ता है और मानवता के साथ जोड़ता है।”

मोदी ने कहा कि भारत अब योग को केवल एक आध्यात्मिक अभ्यास नहीं, बल्कि एक विज्ञान-आधारित चिकित्सा प्रणाली के रूप में विकसित कर रहा है। उन्होंने AIIMS दिल्ली के शोध का ज़िक्र करते हुए कहा कि कार्डियक, न्यूरोलॉजिकल और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में योग की अहम भूमिका साबित हो रही है।

उन्होंने कहा, “देश के बड़े मेडिकल संस्थान अब योग पर रिसर्च कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि योग को आधुनिक मेडिकल साइंस का हिस्सा बनाया जाए, जिससे विश्वस्तरीय प्रमाण आधारित थेरेपी तैयार की जा सके।” प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में ‘हील इन इंडिया’ का जिक्र करते हुए बताया कि भारत अब मेडिकल और वेलनेस टूरिज़्म का हब बनता जा रहा है। उन्होंने बताया कि योग की लोकप्रियता की वजह से 130 से ज़्यादा संस्थानों में 6.5 लाख से अधिक ट्रेंड वॉलंटियर्स एक समग्र वेलनेस ईकोसिस्टम पर काम कर रहे हैं।

“हमने ई-आयुष वीजा की सुविधा शुरू की है ताकि दुनिया भर से लोग भारत आकर इस वेलनेस संस्कृति का लाभ ले सकें,” उन्होंने कहा। इस साल की थीम ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग’ को प्रधानमंत्री ने अत्यंत सारगर्भित बताते हुए कहा कि यह हमें हमारे पर्यावरण, मिट्टी, जल, पशु-पक्षी और पूरे इकोसिस्टम के साथ हमारे गहरे संबंध की याद दिलाता है।

“योग हमें ये सिखाता है कि हम अकेले नहीं हैं, हम प्रकृति का हिस्सा हैं। जब धरती स्वस्थ होगी, तभी मानवता भी स्वस्थ रह पाएगी।” योग दिवस 2025 का यह आयोजन न सिर्फ संख्या के लिहाज से ऐतिहासिक रहा, बल्कि इसके जरिए भारत ने एक बार फिर दुनिया को शांति, संतुलन और स्वास्थ्य का संदेश दिया। प्रधानमंत्री मोदी का ‘हील इन इंडिया’ का मंत्र और योग पर आधारित वैज्ञानिक दृष्टिकोण, भारत को आने वाले वर्षों में वेलनेस लीडरशिप की दिशा में अग्रणी बना सकता है।

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