बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) के महापौर पद के लिए आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि यह पद सामान्य महिला (ओपन वुमन) श्रेणी के लिए आरक्षित रहेगा। शहरी विकास विभाग द्वारा मंत्रालय में आयोजित लॉटरी में यह फैसला लिया गया, जिसके बाद मुंबई की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इससे स्पष्ट हो गया है कि मुंबई को वर्ष 2026 में एक महिला महापौर मिलने जा रही है।
महापौर पद का आरक्षण रोटेशन प्रणाली के तहत तय किया जाता है, जिसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी और महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिया जाता है।
इसी प्रक्रिया के तहत यह तय हुआ कि मुंबई का महापौर सामान्य वर्ग से होगा और महिला आरक्षण लागू रहेगा। इसके साथ ही भाजपा, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के बीच महापौर पद को लेकर राजनीतिक रणनीति तेज हो गई है।
हालांकि, आरक्षण लॉटरी को लेकर शिवसेना (यूबीटी) ने आपत्ति दर्ज कराई है। पार्टी का आरोप है कि मुंबई को जानबूझकर ओबीसी आरक्षण की लॉटरी से बाहर रखा गया।
पूर्व महापौर किशोरी पेडनेकर ने कहा कि रोटेशन के अनुसार इस बार मुंबई को ओबीसी कोटे में शामिल किया जाना चाहिए था और सरकार ने नियमों में बदलाव कर कुछ वर्गों को अवसर से वंचित किया है। कांग्रेस ने भी परभणी नगर निगम की लॉटरी पर आपत्ति जताई है।
इस बीच, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) 2026 में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य ने इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टील और तकनीक जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश समझौते किए हैं। साथ ही, एमआईटी और बर्कले जैसी अंतरराष्ट्रीय यूनिवर्सिटीज के साथ एमओयू साइन किए गए हैं, जिससे महाराष्ट्र में तकनीकी और सिस्टम सुधार को बढ़ावा मिलेगा।
करीब चार साल बाद प्रशासक शासन समाप्त होने के बाद 31 जनवरी से बीएमसी में निर्वाचित पार्षद कामकाज संभालेंगे। नई नगर निगम के सामने बाढ़ नियंत्रण, जलापूर्ति और सड़कों के कंक्रीटीकरण जैसी बड़ी परियोजनाएं प्राथमिकता होंगी। महापौर पद के आरक्षण ने जहां महिला नेतृत्व का रास्ता खोला है, वहीं सियासी टकराव को भी नई धार दे दी है।
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