राजस्थान के कई मुस्लिम संगठनों द्वारा 2020 दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद को राज्यसभा के लिए नामित करने की मांग की है। इन संगठनों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपकर आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए खालिद की उम्मीदवारी पर विचार करने की अपील की है।
दरअसल जून में राज्यसभा की तीन सीटें खाली होने वाली हैं। संगठनों का तर्क है कि राजस्थान से मुस्लिम समुदाय का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है और खालिद की उम्मीदवारी इस कमी को दूर कर सकती है। उनका कहना है कि यह कदम नागरी अधिकारों के प्रति कांग्रेस पार्टी की प्रतिबद्धता को भी दर्शाएगा।
राजस्थान मुस्लिम अलायंस के प्रदेश अध्यक्ष और कांग्रेस कार्यकर्ता मोहसिन राशिद ने कहा, “2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मुस्लिम समुदाय से बड़ा समर्थन मिला था, जो 2024 के लोकसभा चुनाव में और बढ़ा।” रशीद ने दावा किया कि राज्य की आबादी में 9 से 10 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने के बावजूद मुस्लिम समुदाय को संसद में प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है।
हालांकि, इस मांग ने नया विवाद खड़ा कर दिया है क्योंकि उमर खालिद दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए हिंदू विरोधी दंगों के मामले में आरोपी हैं। उसे सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया, उस पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) सहित भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज है। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी।
जांच एजेंसियों ने खालिद पर दंगों की साजिश रचने, भीड़ को उकसाने और हिंसा फैलाने के आरोप लगाए हैं। कहा जाता है कि उसने दंगों के दौरान PFI में अपने कॉन्टैक्ट्स के ज़रिए लॉजिस्टिक सपोर्ट का भरोसा दिलाने के लिए AAP के पूर्व काउंसलर ताहिर हुसैन और एक दूसरे आरोपी खालिद सैफी से मुलाकात की थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, एजेंसियां माओवादियों के बीच सांठगांठ पर नज़र रख रही हैं और चेतावनी दे रही थीं की खालिद ऐसे फ्रंट ऑर्गनाइज़ेशन से जुड़ा जिनका कट्टरपंथी इस्लामिस्ट जमात-ए-इस्लामी हिंद, वेलफेयर पार्टी ऑफ़ इंडिया, और प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन SIMI से संबंध है।
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