आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद को लेकर केंद्र सरकार पर हमला करते हुए एक विवादित बयान दिया है। केजरीवाल ने मेडिकल उम्मीदवारों के गुस्से को राजनीतिक हथियार बनाते हुए भारतीय युवाओं (Gen-Z) से अपील की है कि वे नेपाल और बांग्लादेश की तरह सड़कों पर उतरकर ‘हिंसक विरोध’ के जरिए सत्ता को चुनौती दें।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा 3 मई की परीक्षा रद्द किए जाने के बाद 22 लाख से अधिक छात्र अनिश्चितता के भंवर में हैं और मामला सीबीआई (CBI) के पास है।
केजरीवाल ने अपने संबोधन में पिछले साल नेपाल में हुए हिंसक छात्र आंदोलनों और बांग्लादेश के विरोध प्रदर्शनों का सीधा संदर्भ दिया। उन्होंने भारतीय युवाओं को उकसाते हुए कहा, “मैं जेन-जी (Gen-Z) से पूछना चाहता हूं: क्या यह सिलसिला चलते रहना चाहिए? अगर नेपाल और बांग्लादेश की जेन-जी सड़कों पर उतरकर अपनी सरकारें बदल सकती है, तो क्या हमारी जेन-जी पेपर लीक में शामिल मंत्रियों को जेल नहीं भेज सकती?”
SHOCKER 🚨 Kejriwal now says "I have a direct question for Gen Z after Paper Leak. If the Gen Z of Nepal-Bangladesh can take to the streets and change their Govt, can’t our Gen Z send these ministers responsible for paper leaks to jail?" pic.twitter.com/bbPf5qmauU
— News Algebra (@NewsAlgebraIND) May 13, 2026
गौरतलब है कि 2025 में नेपाल में हुए विरोध प्रदर्शनों में बड़े पैमाने पर हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ हुई थी, जिसमें कम से कम 14 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी और सेना तक को तैनात करना पड़ा था। केजरीवाल द्वारा इस तरह के हिंसक आंदोलनों को ‘रोमांटिक’ बनाकर पेश करने पर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि वे छात्रों के भविष्य के बजाय अराजकता को बढ़ावा दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 में सत्ता संभालने के बाद से अब तक 93 पेपर लीक होने का दावा करते हुए केजरीवाल ने आरोप लगाया कि इससे लगभग 6 करोड़ युवाओं का भविष्य बर्बाद हुआ है। केजरीवाल ने दावा किया कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात जैसे भाजपा शासित राज्य इन धांधलियों के मुख्य केंद्र हैं। साथ ही दावा किया की प्रभावशाली नेताओं के संरक्षण के बिना इतने बड़े स्तर पर पेपर लीक संभव नहीं है।
केजरीवाल ने इस मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने जांच प्रक्रिया को एक घिसा-पिटा चक्र बताते हुए कहा, “नीट पेपर लीक हुआ और हर बार की तरह जांच सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई 10-15 लोगों को गिरफ्तार करेगी और फिर हर बार की तरह, तीन-चार महीने में वे सभी जमानत पर बाहर आ जाएंगे।”
उन्होंने सवाल किया कि क्या छात्रों और अभिभावकों का अब देश की जांच एजेंसियों पर कोई भरोसा बचा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार अरविंद केजरीवाल ने हताश छात्रों की आड़ में खतरनाक रेखा पार कर दी है। संवैधानिक और लोकतांत्रिक उपायों के बजाय पड़ोसी देशों में हुई अस्थिरता और हिंसा का उदाहरण देकर वे भारत में भी ‘विद्रोही’ राजनीति को जन्म देना चाहते हैं।
जहाँ एक तरफ केंद्र सरकार सख्त कार्रवाई और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली का आश्वासन दे रही है, वहीं केजरीवाल का यह रुख छात्रों के भावनात्मक आक्रोश को राज्य के विरुद्ध एक बड़े आंदोलन में बदलने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
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