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Sunday, October 25, 2026
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झारखंड छात्र आंदोलन पर नीतीश मिश्रा का विपक्ष से सवाल, दोहरे मानदंड क्यों?

उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण हैं, लेकिन विपक्ष अलग-अलग राज्यों में छात्र आंदोलनों को लेकर अलग-अलग नजरिया अपनाता है। 

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बिहार सरकार के मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नीतीश मिश्रा ने झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए कांग्रेस और विपक्षी दलों पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है।

उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण हैं, लेकिन विपक्ष अलग-अलग राज्यों में छात्र आंदोलनों को लेकर अलग-अलग नजरिया अपनाता है।

भाजपा प्रदेश कार्यालय में मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में नीतीश मिश्रा ने कहा कि दिल्ली में जब छात्र सड़क पर उतरे थे, तब कांग्रेस और विपक्ष के कई बड़े नेता पूरी प्रखरता के साथ उनके समर्थन में खड़े दिखाई दिए थे। वहीं, झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं से जुड़े सवालों को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन विपक्ष उनकी सुध लेने को तैयार नहीं है।

उन्होंने सवाल किया कि क्या झारखंड में आंदोलन कर रहे छात्र देश के छात्र नहीं हैं? उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों को अपनी बात शांतिपूर्ण और उचित तरीके से रखने का अधिकार है। ऐसे में दिल्ली और झारखंड के छात्र आंदोलनों को लेकर विपक्ष के रवैये में अंतर क्यों है, यह सवाल देश के युवाओं के मन में भी उठ रहा है। मंत्री ने कहा कि किसी मुद्दे पर राजनीतिक सुविधा के अनुसार अपना स्टैंड बदलना विपक्ष की विरोधाभासी नीति को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि यदि मुद्दा छात्रों का है, तो अलग-अलग स्थानों पर उसके प्रति नजरिया भी एक समान होना चाहिए। संसद में विपक्ष के रवैये पर भी नीतीश मिश्रा ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पिछले करीब 15 दिनों से संसद की कार्यवाही को लगातार बाधित करने का प्रयास किया जा रहा है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में स्पष्ट किया है कि सरकार हर विषय पर चर्चा और जवाब देने के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा कि संसद नियमों और संसदीय परंपराओं के अनुसार चलती है। विपक्ष को अपने मुद्दे सदन में रखने चाहिए और सरकार की ओर से दिए जाने वाले जवाब को भी धैर्यपूर्वक सुनना चाहिए। बार-बार मुद्दे बदलना और संसद की कार्यवाही को बाधित करना यह दर्शाता है कि विपक्ष गंभीर बहस से बचना चाहता है।

नीतीश मिश्रा ने कहा कि उनका सवाल छात्र आंदोलन के अधिकार को लेकर नहीं, बल्कि विपक्ष के अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग स्टैंड को लेकर है।

उन्होंने कहा कि बिहार में भी कर्मचारी संगठनों की हड़ताल के दौरान बातचीत के माध्यम से समाधान निकाला गया। लोकतंत्र की खूबसूरती संवाद और विमर्श में है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की विरोधाभासी नीति जनता और विशेषकर युवाओं के सामने है। युवा यह देख रहे हैं कि राजनीतिक सुविधा के अनुसार विपक्ष किस प्रकार अलग-अलग मुद्दों पर अपना रुख बदलता है।

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