नोएडा में औद्योगिक श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन ने सोमवार(13 अप्रैल) को व्यापक और हिंसक रूप ले लिया, जहां हजारों कामगारों ने कम वेतन, साप्ताहिक अवकाश की कमी और खराब कार्य परिस्थितियों को लेकर आवाज उठाई। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से फेज-2 और सेक्टर-63 जैसे औद्योगिक इलाकों में शुरू हुआ, जो बाद में कई स्थानों पर हिंसक घटनाओं में बदल गया। हालांकि, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति के साथ हुई बैठक के बाद संवाद की प्रक्रिया शुरू हो गई है और आगे भी कई दौर की बातचीत प्रस्तावित हैं। जानकारी के अनुसार, हिंसक घटनाओं में शामिल ३०० लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों का कहना है कि वर्तमान वेतन संरचना बढ़ती महंगाई के अनुरूप नहीं है। अधिकांश श्रमिकों की मासिक आय 10,000 से 15,000 रुपये के बीच है, जिसे वे बुनियादी जरूरतों के लिए अपर्याप्त मानते हैं। समिति के साथ बैठक में श्रमिक प्रतिनिधियों ने वेतन को 18,000 से 20,000 रुपये तक बढ़ाने, सप्ताह में एक अनिवार्य अवकाश और कार्यस्थलों पर बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग रखी।
श्रमिकों ने यह भी स्पष्ट किया कि मुद्दा केवल वेतन तक सीमित नहीं है। उन्होंने लंबे कार्य घंटे, ओवरटाइम का उचित भुगतान न होना और सम्मानजनक व्यवहार की कमी जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। कई श्रमिकों ने कहा कि ओवरटाइम के लिए दोगुना भुगतान नियमों के अनुसार लागू नहीं किया जा रहा है।
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि यह बैठक सभी पक्ष श्रमिकों, उद्योग प्रबंधन और श्रमिक संगठनों की बात सुनने के लिए आयोजित की गई थी। समिति ने आश्वासन दिया कि श्रमिकों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और जल्द ही ठोस निर्णय लिए जाएंगे।
सोमवार को कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया था। पत्थरबाजी, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं में 50 से अधिक फैक्ट्रियों और 150 से ज्यादा वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा, जिससे यातायात व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई। हालांकि नोएडा पुलिस ने रातभर छापेमारी अभियान चलाकर करीब 300 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि 100 से अधिक लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं और उनकी फोरेंसिक जांच की जा रही है। साइबर सेल सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट और अफवाहों की निगरानी कर रही है।
नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने चेतावनी दी है,”अगर कोई पब्लिक ऑर्डर में रुकावट डालने या कानून अपने हाथ में लेने में शामिल पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।” वहीं, उत्तर प्रदेश के श्रम मंत्री अनिल राजभर ने हिंसा को सुनियोजित षड्यंत्र करार देते हुए कहा कि, “ऐसा प्रतीत होता है कि यह घटना राज्य के विकास और कानून व्यवस्था को बाधित करने के इरादे से अंजाम दी गई है। हाल के दिनों में मेरठ और नोएडा से चार संदिग्ध आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके संबंध पाकिस्तान स्थित संचालकों से थे। ऐसे में राज्य में अस्थिरता पैदा करने की साजिश की संभावना और भी बढ़ जाती है। एजेंसियां पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही हैं।”
उन्होंने श्रमिकों से शांत रहने और उकसावे या गलत सूचनाओं से प्रभावित न होने का आग्रह किया। राजभर ने कहा, “उन्हें किसी भी भ्रामक जानकारी या उकसावे का शिकार नहीं होना चाहिए और शांति बनाए रखनी चाहिए। अराजकता और आक्रामक विरोध प्रदर्शन किसी भी समस्या का समाधान नहीं हैं। सरकार श्रमिकों की हर चिंता सुनने के लिए तैयार है।”
पुलिस के अनुसार, लगभग 40,000 से 45,000 श्रमिक 80 से अधिक स्थानों पर एकत्र हुए थे, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हुई। अधिकारियों ने बताया कि अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है।
गौतम बुद्ध नगर की पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने सोमवार रात पत्रकारों को बताया, “मजदूरों के शांतिपूर्वक तितर-बितर होने के बाद, जिले के बाहर से एक समूह पड़ोसी जिलों से सटे इलाकों में पहुंचा। वे तनाव भड़काने और हिंसा उकसाने की कोशिश में इधर-उधर घूम रहे थे। हमने इस समूह के कुछ सदस्यों को हिरासत में ले लिया है और शेष व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई शुरू की जाएगी।”
पुलिस ने यह भी बताया कि श्रमिकों द्वारा उठाई गई पांच मांगों में से चार को स्वीकार कर लिया गया है। शेष मुद्दों को सुलझाने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है और इसकी एक बैठक हो चुकी है। सरकार ने श्रमिकों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और काम पर लौटने की अपील की है, साथ ही भरोसा दिलाया है कि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
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