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ओबामा ने ट्रंप की ईरान नीति पर उठाए सवाल, कहा- हालात पहले से भी बदतर!

ईरान के साथ अमेरिका के पिछले परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एनबीसी को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप प्रशासन की ईरान नीति की आलोचना की।

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अमेरिका-ईरान के बीच पीस डील हो चुकी है। जी7 समिट से लेकर ट्रुथ सोशल से लगातार वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को निशाने पर लेते आए हैं। ‘जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन’ (जेसीपीओए) को ‘ईरान को रिश्वत देने की कोशिश’ कहते आए हैं और अपने हालिया शांति समझौते को बेहतरीन करार दे रहे हैं। अब ओबामा ने ईरान नीति की सख्त मुखालफत की है। उन्होंने कहा है कि हालात पहले से बदतर हो गए हैं।

ईरान के साथ अमेरिका के पिछले परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एनबीसी को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप प्रशासन की ईरान नीति की आलोचना की।

शुक्रवार को प्रसारित कार्यक्रम में, ओबामा ने कहा, “हमने अब एक युद्ध लड़ा है, अरबों-खरबों डॉलर खर्च किए हैं, अपनी सेना पर भारी दबाव डाला है। बहुत से लोगों की जान गई है। और ऐसा लगता है कि हम वहीं वापस आ गए हैं जहां युद्ध शुरू करने से पहले थे, बल्कि शायद स्थिति उससे भी थोड़ी खराब हो गई है।”

ओबामा ने कहा कि वह संघर्ष विराम से खुश हैं और उम्मीद करते हैं कि यह कायम रहेगा। उन्होंने कहा, “मैं युद्धविराम देखकर बहुत खुश हूं और आशा करता हूं कि यह बना रहेगा।”

इसके साथ ही पूर्व राष्ट्रपति ने ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान के खिलाफ अपनाई गई नीति और सैन्य कार्रवाई के औचित्य पर भी सवाल उठाया, कहा कि उनके कार्यकाल में हुए ईरान परमाणु समझौते के तहत ईरान ने परमाणु हथियार विकसित न करने पर सहमति जताई थी।

ओबामा ने कहा, “ईरान ने परमाणु हथियार विकसित नहीं करने पर सहमति दी थी। इस प्रशासन ने, या इसी प्रशासन ने पहले, उस समझौते से खुद को अलग कर लिया, जिसके परिणामस्वरूप ईरान ने अपनी परमाणु क्षमता को और बढ़ाया।”

दरअसल, 2015 में बराक ओबामा प्रशासन ने ईरान के साथ ‘जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन’ (जेसीपीओए) नाम से एक परमाणु समझौता किया था। ट्रंप प्रशासन की नीतियों से अलग, यह एक विस्तृत और औपचारिक समझौता था, जिसमें 160 से अधिक पन्नों का दस्तावेज शामिल था। इसका मुख्य उद्देश्य ईरान की परमाणु गतिविधियों पर रोक लगाना और उसके परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना था।

हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने इसे “बेहद खराब” बताया था और 2018 में अमेरिका को इससे अलग कर समझौता रद्द कर दिया था।

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