लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया में आयोजित 11वें ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान ईरान की संसद (मजलिस) के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद बाघेर ग़ालिबफ से मुलाकात की। इस द्विपक्षीय बैठक में भारत और ईरान के बीच पारंपरिक मित्रता, क्षेत्रीय सहयोग और वैश्विक चुनौतियों पर विशेष चर्चा हुई।
बातचीत में चाबहार बंदरगाह का उल्लेख खासतौर से हुआ, जो दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के बीच संपर्क का महत्वपूर्ण केंद्र है। दोनों नेताओं ने इस रणनीतिक बंदरगाह के जरिए व्यापारिक, आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की संभावनाओं पर विचार किया।
ओम बिरला ने इस मुलाकात की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा की। उन्होंने लिखा:
‘ब्रासीलिया में 11वें ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान ईरान की संसद (मजलिस) के अध्यक्ष, महामहिम डॉ. मोहम्मद बाघेर ग़ालिबफ़ से गर्मजोशी से बातचीत हुई। इस मुलाकात में भारत और ईरान के पुराने और दोस्ताना संबंधों पर चर्चा हुई। बातचीत में चाबहार बंदरगाह के जरिए आपसी संपर्क बढ़ाने, संसदीय सहयोग मजबूत करने और क्षेत्रीय व वैश्विक चुनौतियों का समाधान तलाशने पर विशेष ध्यान दिया गया।’
बातचीत में आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता की भी बात उठी। बिरला ने कहा कि भारत कानूनी उपायों, तकनीकी सुधारों और एजेंसियों के तालमेल के माध्यम से आतंकवाद से सख्ती से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस दिशा में ईरान के सहयोग की भी सराहना की।
बैठक के दौरान ओम बिरला ने डॉ. ग़ालिबफ को 2026 में भारत में प्रस्तावित ब्रिक्स संसदीय मंच में भाग लेने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया।
एक अन्य सत्र में, ओम बिरला ने ‘जिम्मेदार और समावेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए अंतर-संसदीय सहयोग’ विषय पर भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि एआई केवल तकनीकी विकास नहीं, बल्कि यह प्राचीन सभ्यतागत मूल्यों और आधुनिक नवाचार का अनूठा मेल है। उन्होंने कहा, ‘यह दृष्टिकोण दिखाता है कि एआई मानव-केंद्रित होना चाहिए, जो न्याय, समानता और मानवाधिकारों जैसे मूल्यों की सेवा करे।’
बिरला ने भारत द्वारा एआई के माध्यम से स्वास्थ्य, कृषि, जलवायु परिवर्तन, शिक्षा और सुशासन जैसे क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयोगों का भी उल्लेख किया, जिससे समाज के कमजोर तबकों को भी इसका लाभ मिल सके।चाबहार बंदरगाह से लेकर एआई तक, दोनों देशों ने सहयोग के नए आयामों पर गंभीर चर्चा की है। इससे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की सक्रियता और समावेशी दृष्टिकोण एक बार फिर दुनिया के सामने आया है।
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