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Thursday, July 9, 2026
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पाकिस्तान नेता विपक्ष ने पीओके हिंसा को जलियांवाला बाग नरसंहार’ से की!

अगर अब और लोगों को मारना चाहते हैं, तो मार दीजिए। फिर यह एक और जलियांवाला बाग होगा। उसके बाद जनरल डायर का अंजाम भी याद रखिए।"

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पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर जल रहा है। महीनों से अपने हक को लेकर लोग आंदोलनरत हैं। हाल ही में निहत्थे लोगों पर सुरक्षाबलों की बर्बर कार्रवाई में 18 निर्दोष मारे गए। पाकिस्तानी संसद में नेता प्रतिपक्ष महमूद खान अचकजई इस पूरे घटनाक्रम से आहत हैं, और उन्होंने इन मौतों की तुलना जलियांवाला बाग नरसंहार से की है।

वरिष्ठ राजनेता ने अपनी एक्स अकाउंट पर प्रेस वार्ता के कुछ वीडियो क्लिप्स साझा किए हैं। सोमवार (29 जून) रात हुई प्रेस ब्रीफिंग में पाकिस्तानी सत्ता को उसका क्रूर चेहरा दिखाते हुए महमूद खान ने कहा, “आपने संवेदनशील क्षेत्र में 18 लोगों की जान ले ली। अगर अब और लोगों को मारना चाहते हैं, तो मार दीजिए। फिर यह एक और जलियांवाला बाग होगा। उसके बाद जनरल डायर का अंजाम भी याद रखिए।”

उन्होंने याद दिलाया, “सौ साल बाद जब महारानी एलिजाबेथ भारत आई थीं, तब भारत सरकार ने जलियांवाला बाग हत्याकांड के लिए माफी मांगने को कहा था।”

अचकजई ने पीओके का दर्द बयां किया। उन्होंने कहा, “यहां के लोग ऐसे नहीं थे जो चाकू, खंजर या बंदूक उठाते। आखिर उन्हें इस हद तक पहुंचने के लिए क्यों मजबूर किया गया? उन पर गोलियां चलाई गईं और 11 से अधिक लोगों की जान चली गई।”

उन्होंने दावा किया कि इस दौरान विभिन्न संगठनों ने उनसे संपर्क कर कहा, “भाई, हमारे और सरकार के बीच खड़े हो जाइए।”सरकार को खुली चेतावनी देते हुए अचकजई ने कहा, “अगर हिम्मत है तो हमें भी जेल भेज दीजिए। आपने कोट लखपत जेल के 70 वर्षीय कैदियों को भी 280 साल की सजा सुना दी। आखिर यह सब क्यों? ऊपर वाले से डरिए।”

दरअसल, कोट लखपत जेल (लाहौर) में बंद 70 साल की राजनेता और पाकिस्तान की पूर्व पंजाब स्वास्थ्य मंत्री डॉ. यास्मीन राशिद को हिंसक प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में 280 साल की जेल की सजा सुनाई गई है।

उन्होंने पाकिस्तान में व्याप्त भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हुए कहा, “जो लोग संसदों की खरीद-फरोख्त करते हैं, वे पाकिस्तान के नायक बन जाते हैं, जबकि जो लोकतांत्रिक पाकिस्तान चाहते हैं, आप उनके खिलाफ खड़े हो जाते हैं।

आप अपने ही लोगों पर दबाव क्यों बना रहे हैं? यह आपकी घोषित विचारधारा से मेल नहीं खाता। आप चुनावों और विधानसभा की खरीद-फरोख्त को गलत नहीं मानते, लेकिन जो लोग इसका विरोध करते हैं, उन्हें गद्दार करार देते हैं। क्या आपकी सोच पर पर्दा पड़ गया है?”
 
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