27.6 C
Mumbai
Tuesday, July 7, 2026
होमदेश दुनियासनातन संस्कृति के महान संवाहक थे पंडित राधेश्याम कथावाचक: सीएम योगी!

सनातन संस्कृति के महान संवाहक थे पंडित राधेश्याम कथावाचक: सीएम योगी!

उन्होंने कहा कि मुझे प्रसन्नता है कि जिसकी कथा सुनते-सुनते हम बड़े हुए, आज उनकी प्रतिमा का अनावरण करने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ।

Google News Follow

Related

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को पंडित राधेश्याम कथावाचक स्मृति भवन ऑडिटोरियम में हिन्दी साहित्य एवं लोकनाट्य परंपरा के महान नाटककार एवं सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित राधेश्याम कथावाचक की प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया।

सीएम योगी ने ‘सीयावर रामचंद्र की जय’ के उद्घोष के साथ अपने संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने सुप्रसिद्ध कथानायक पंडित राधेश्याम की स्मृति में आयोजित प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में उपस्थित सभी मंचासीन अतिथियों एवं जनसमुदाय का अभिनंदन करते हुए उनके साहित्यिक एवं सांस्कृतिक योगदान को नमन किया।

उन्होंने कहा कि मुझे प्रसन्नता है कि जिसकी कथा सुनते-सुनते हम बड़े हुए, आज उनकी प्रतिमा का अनावरण करने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि जो समाज अपनी विरासत का सम्मान और संरक्षण करता है, उसी समाज का विकास का मार्ग प्रशस्त भी होता है और जो अपने पूर्वजों की, अपनी विरासत की दुर्गति करता है, वह अपने उन्नती के मार्ग की दुर्गति करता है। विरासत का सम्मान हमारी प्रगति का आधार है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि श्रीराम कथा के माध्यम से देश को जोड़ने का कार्य किया, तुलसी दास जी ने राम नाम की ताकत का एहसास कराया, उनसे लोगों ने कहा कि आप राज दरबार में जाएंगे तो आपको भी नौरत्नों में शामिल किया जाएगा, लेकिन उन्होंने कहा कि मेरा राजा एक ही है वो प्रभु श्रीराम हैं।

उन्होंने कहा कि जो कार्य तुलसीदास जी ने रामचरित मानस के माध्यम से लोगों को जोड़ा, वहीं काम पं राधेश्याम कथावाचक ने किया, उनके संवाद रामलीला मंचन का आधार बने। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में पं राधेश्याम की महत्वपूर्ण भूमिका है, उनके प्रति कर्तज्ञता ज्ञापित करना हमारा दायित्व है। उन्होंने कहा कि राम की भक्ति जिसने कि वह चाहे वो जटायू हो या हनुमान जी हो उनका उद्धार हुआ है।

उन्होंने कहा कि मध्यकाल में जो कार्य तुलसीदास जी ने किया, त्रेतायुग में महर्षि वाल्मीकि ने किया है, वही कार्य आधुनिक काल में पं राधेश्याम जी ने किया है। उन्होंने कहा कि पंडित जी का सनातन धर्म के प्रति बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि सनातन भारत की आत्मा है, और जिस महापुरुष ने इस आत्मा को मजबूती प्रदान की है, उस महापुरुष के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना हमारी जिम्मेदारी बनती है।

पंडित जी ने राम नाम की महत्ता से हम सब को बहुत ही सरल भाषा में, सहजता के साथ संवादों के माध्यम से जागरूक किया है। पंडित जी ने रामायण को लोक व्यवहार की भाषा में, सरल भाषा में प्रस्तुत किया है। आज हमें उनकी मूर्ति के अनावरण के माध्यम से उनके प्रति कृतज्ञता जाहिर करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित राधेश्याम कथावाचक ने अपनी लेखनी और कथावाचन के माध्यम से भारतीय संस्कृति, रामकथा एवं सनातन मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। उनका साहित्यिक योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे महान साहित्यकारों और सांस्कृतिक विभूतियों का सम्मान करना समाज और शासन दोनों का दायित्व है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1983 में पंडित राधेश्याम ने अपने भौतिक व नश्वर देह से मुक्ति प्राप्त की, लेकिन उनको वो सम्मान नहीं मिल सका जो उन्हें आज मिला। उन्होंने कहा कि पंडित राधेश्याम जी के घर को पर्यटन विभाग के माध्यम से म्यूजियम बनाया जाए, जिसमें राज्य सरकार सहयोग करेगी। इस म्यूजियम में पंडित जी की समस्त स्मृतियां संग्रहित की जाएगी, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी उसका लाभ प्राप्त कर सकती हैं।

कार्यक्रम में बताया गया कि पंडित राधेश्याम कथावाचक का जन्म 25 नवम्बर 1890 को बरेली शहर के बिहारीपुर मोहल्ले में पंडित बांकेलाल के परिवार में हुआ था। वे हिन्दी साहित्य के महान नाटककार एवं प्रसिद्ध कथावाचक थे। उनकी सर्वाधिक लोकप्रिय कृति ‘‘राधेश्याम रामायण‘’ है, जिसे उन्होंने खड़ीबोली और लोकनाट्य शैली में 25 खण्डों में पद्यबद्ध किया।

मात्र 17 वर्ष की आयु में रचित इस अमर कृति ने देशभर में अभूतपूर्व लोकप्रियता प्राप्त की। उनके जीवनकाल में ही इसकी हिन्दी एवं उर्दू में कुल मिलाकर लगभग पौने दो करोड़ से अधिक प्रतियाँ प्रकाशित एवं विक्रय हुईं।

पंडित राधेश्याम कथावाचक ने स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने भी उन्हें राष्ट्रपति भवन आमंत्रित कर 15 दिनों तक राम कथा श्रवण किया था। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए धन संग्रह के दौरान उन्होंने अपनी एक वर्ष की संपूर्ण आय महामना मदन मोहन मालवीय को समर्पित कर दी थी। अपनी आत्मकथा ‘मेरा नाटक काल’ का लेखन भी उन्होंने जीवन के अंतिम चरण में किया।

कार्यक्रम के अंत में महापौर डॉ. उमेश गौतम द्वारा सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कार्यक्रम का संचालन अवनीश कुमार द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में पंडित राधेश्याम कथावाचक के परिवार से पंडित राधेश्याम की पौत्री शारदा भार्गव, पौत्र काशीनाथ शर्मा व उनकी पत्नी ज्योति शर्मा, पौत्र स्व. विश्वनाथ शर्मा की पत्नी विजय लक्ष्मी शर्मा सहित अन्य सदस्यगण उपस्थित रहें।

 
यह भी पढ़ें-

अयोध्या नजरबंदी पर सियासत तेज, कांग्रेस बोली- डरी भाजपा सरकार!

National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

151,156फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
320,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें