प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (14 सितंबर)को असम के दरांग जिले में जनसभा को संबोधित करते हुए घुसपैठ और जनसांख्यिकी परिवर्तन को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक बताया और कहा कि सरकार इस चुनौती के विरुद्ध ठोस कदम उठाएगी।
प्रधानमंत्री ने सभा में अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों की मदद से देश की जनसांख्यिकी बदलने की साजिश रची जा रही है और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के गंभीर खतरे के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “भाजपा की सरकार घुसपैठियों को देश के साधनों और संसाधनों पर कब्जा करने नहीं देगी। भारत के किसानों, नौजवानों और हमारे आदिवासियों का हक हम किसी को छीनने नहीं देंगे। ये घुसपैठिये हमारी माताओं और बहनों के साथ अत्याचार करते हैं और ऐसा हम होने नहीं देंगे। सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठियों की मदद से जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी) बदलने की साजिश चल रही है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा है।”
इस बीच प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केंद्र और भाजपा का उद्देश्य देश की अखंडता और सीमाओं की रक्षा करना है। उन्होंने घोषणा की, “देश में एक डेमोग्राफी मिशन (जनसांख्यिकी मिशन) शुरू किया जा रहा है। भाजपा का उद्देश्य देश को घुसपैठियों से बचाना और उसकी अखंडता को बहाल करना है। मैं उन राजनेताओं को कहना चाहता हूं, अगर वे चुनौती लेकर मैदान में आएंगे तो मैं उनका सीना तानकर सामना करूंगा। मैं भी देखता हूं कि वे घुसपैठियों को बचाने में कितनी ताकत लगाएंगे। हम घुसपैठियों को हटाने में अपना जीवन लगा देंगे, वे सामने आएं और मुकाबला करें। घुसपैठियों को बचाने के लिए निकले लोगों को भुगतना पड़ेगा और उन्हें मेरे ये शब्द जरूर सुनने चाहिए। यह देश उनको माफ नहीं करेगा।”
प्रधानमंत्री ने इस दौरान असम की सांस्कृतिक विरासत और विकास पर भी ज़ोर दिया और कहा कि असम को ‘विकसित’ भारत का एक इंजिन बनाना जरूरी है। उन्होंने लोगों से स्वदेशी सामान अपनाने की अपील करते हुए कहा, “मैं आपसे वादा मांगता हूं कि अब जो भी खरीदेंगे, वह ‘स्वदेशी’ होगा। मेरे लिए स्वदेशी की परिभाषा सरल है। कंपनी दुनिया के किसी भी कोने से हो, लेकिन मेहनत मेरे देश के युवा सैनिकों की होनी चाहिए। जो भारत में बनेगा, उसमें मेरी भारतीय मिट्टी की खुशबू होनी चाहिए।”
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